धार्मिक कथाएं समाज को संस्कृति से जोड़ती हैं : आचार्य गोपाण शरण जी महाराज
बदायूं
शहर के मोहल्ला कृष्णापुरी स्थित श्री जी रिसॉर्ट में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन कथा व्यास आचार्य गोपाण शरण जी महाराज ने धर्म और जीवन मूल्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दया, सत्य, दान और शुचिता धर्म के चार पैर हैं, लेकिन कलियुग में दया, शुचिता और सत्य लगभग समाप्त हो चुके हैं, केवल दान ही कुछ मात्रा में शेष है। इसी कारण आज धर्म के प्रचार-प्रसार की अधिक आवश्यकता है। धार्मिक कथाएं समाज को उसकी संस्कृति और संस्कारों से जोड़े रखती हैं।
श्री राधा कृष्ण सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित कथा में व्यास जी ने कहा कि परमात्मा ही पूर्ण है और संसार अपूर्ण। इसी कारण सांसारिक व्यक्ति के मन में सदैव अपूर्णता बनी रहती है। मनुष्य को भगवान ने जितना दिया है, उसी में संतोष करना चाहिए।
कथा के दौरान रामावतार और चंद्रवंश के प्रसंगों का सुंदर वर्णन किया गया। व्यास जी ने कहा कि जब-जब पृथ्वी पर धर्म की हानि होती है और अधर्म बढ़ता है, तब धर्म की रक्षा के लिए भगवान अवतार लेते हैं। रामावतार और कृष्णावतार को परमात्मा के पूर्ण अवतार माना गया है।
देर रात तक चली कथा में कृष्ण जन्मोत्सव बड़े ही हर्षोल्लास और धूमधाम से मनाया गया। रंग-बिरंगे गुब्बारों से सजे कथा पंडाल में बिस्कुट, टॉफियां सहित विभिन्न खाद्य सामग्री के पैकेटों की भक्तों पर वर्षा की गई। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर जमकर नृत्य किया।
कार्यक्रम का संचालन कामेश पाठक ने किया। पूजन पंडित उमेश शास्त्री ने संपन्न कराया, जबकि मूल पाठ भी पंडित उमेश शास्त्री ने किया। आयोजन को सफल बनाने में समिति अध्यक्ष विनोद कुमार मिश्र, सचिव के.एल. गुप्ता, एम.पी. शर्मा, गिरीश चंद्र पाराशर, मुन्नालाल शर्मा, विश्वनाथ शर्मा, रामवीर शर्मा, दिनेश चंद्र मिश्र, देवेश चंद्र मिश्र, नरेंद्र कुमार शर्मा, अवधेश श्रोत्रिय, ठाकुर सत्यपाल सिंह, आरडी शर्मा, श्रीनिवास तिवारी, ठाकुर अनुज कुमार सिंह, रमाकांत दीक्षित, शिवेकानंद शर्मा, विनीत अग्निहोत्री, नरेंद्र गुप्ता, अनुपम पचौरी, राहुल मिश्र सहित अनेक श्रद्धालुओं का विशेष सहयोग रहा।
Budaun Amarprabhat