संवाददाता गोविन्द देवल
बदायूँ। श्री राधाकृष्ण सेवा समिति की ओर से मोहल्ला कृष्णापुरी स्थित श्री जी रिसार्ट में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन कथा व्यास गोपाल शरण महाराज ने माया और भक्ति के स्वरूप पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि माया सांसारिक लोगों के सामने तो टिक सकती है, लेकिन मायापति भगवान के सामने नहीं। माया बड़ी ठगनी है, जो पहले मनुष्य को अपने मोहजाल में फंसाती है और बाद में उसे दुख देती है।
कथा व्यास ने कहा कि जहां कपट और छल होता है, वहां माया का प्रभाव रहता है और ऐसे स्थान पर भगवान की कृपा नहीं होती। भगवान तो प्रेम के भूखे हैं और वे सहजता व सरलता से प्रेम के बंधन में बंध जाते हैं। छल-कपट से कोई भी भगवान को नहीं बांध सकता। प्रभु पर संदेह करने वालों के सुख धीरे-धीरे क्षीण हो जाते हैं, जबकि भगवान के भक्तों को कष्ट देने वालों को प्रभु कभी क्षमा नहीं करते।
रुक्मिणी मंगल के प्रसंग के माध्यम से उन्होंने बताया कि बेटियां ईश्वर का अमूल्य उपहार होती हैं। जिस घर में बेटियों का सम्मान होता है, वह घर स्वर्ग के समान बन जाता है। उन्होंने कहा कि कन्यादान से बड़ा कोई दान नहीं है।
देर रात तक चली कथा में भगवान श्रीकृष्ण के विवाह संस्कार का प्रसंग विस्तार से सुनाया गया। कथा पंडाल में विवाहोत्सव धूमधाम से मनाया गया। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव में नृत्य किया और कन्यादान की परंपरा निभाई।
कथा का संचालन कामेश पाठक ने किया। पूजन एवं मूल पाठ पंडित उमेश शास्त्री ने संपन्न कराया। इस अवसर पर श्री जी रिसार्ट के मालिक विशाल मौर्य, डॉ. उपासना मौर्य, दीपमाला मौर्य सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
आयोजन में समिति अध्यक्ष विनोद कुमार मिश्र, एमपी शर्मा, गिरीश चंद्र पाराशर, मुन्ना लाल शर्मा, विश्वनाथ शर्मा, रामवीर शर्मा, दिनेश चंद्र मिश्र, देवेश चंद्र मिश्र, नरेंद्र कुमार शर्मा, अवधेश श्रोत्रिय, ठाकुर सत्यपाल सिंह, आरडी शर्मा, श्रीनिवास तिवारी, ठाकुर अनोज कुमार सिंह, रमाकांत दीक्षित, शिवेकानंद शर्मा, विनीत अग्निहोत्री, नरेंद्र गुप्ता, अनुपम पचौरी, राहुल मिश्र आदि का विशेष सहयोग रहा।
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