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बदायूँ में टेली लॉ जागरूकता कार्यक्रम, ग्रामीणों को डिजिटल कानूनी सहायता से जोड़ा

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बदायूँ (संवाददाता: गोविंद देवल)
बदायूँ। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार एवं जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बदायूँ के आदेशानुसार गुरुवार को विकास भवन सभागार में टेली लॉ जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य आम नागरिकों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को न्यायालयीय सहायता के डिजिटल साधनों से जोड़ना था।
कार्यक्रम में सैकड़ों वीएलई (विलेज लेवल एंटरप्रेन्योर) और स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया और योजना के प्रत्यक्ष लाभ व उपयोगिता को समझा। जिला पंचायत राज अधिकारी यावर अब्बास और उप कृषि निदेशक मनोज कुमार ने सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की जानकारी विस्तारपूर्वक दी।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा नामित अधिवक्ता संतोष कुमार सक्सेना ने उपस्थित जनसमूह को भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण अनुच्छेदों और प्राधिकरण द्वारा प्रदान की जाने वाली निःशुल्क विधिक सहायता के बारे में जानकारी दी।
मुख्य वक्ता टेली लॉ राज्य समन्वयक वागीश सिंह ने बताया कि टेली लॉ न्याय तक पहुंच का सशक्त माध्यम है। यह पहल तकनीक के माध्यम से ग्रामीण और दूरदराज के नागरिकों को अनुभवी वकीलों से जोड़ती है, ताकि वे अपने कानूनी सवालों और समस्याओं का समाधान घर बैठे प्राप्त कर सकें। इसके तहत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और टेलीफोन सेवाओं के जरिये वकीलों से सीधे परामर्श लिया जा सकता है, जिससे समय, खर्च और दूरी की बाधाएं समाप्त होती हैं।
उन्होंने कहा कि यह सेवा विशेष रूप से कमजोर, उत्पीड़ित, अनुसूचित वर्गों, महिला-बाल संरक्षण, संपत्ति विवाद, श्रम कानून और सरकारी योजनाओं से जुड़े मामलों के लिए उपलब्ध है। वागीश सिंह ने स्पष्ट किया कि टेली लॉ केवल पूर्व-मुकदमा सलाह तक सीमित नहीं, बल्कि यह एक सशक्त कानूनी जागरूकता मंच भी है जो विवाद बढ़ने से पहले समाधान प्रदान करता है।
कार्यक्रम में सीएससी जिला प्रबंधक आशीष शुक्ल और नितिन शर्मा ने कहा कि डिजिटल युग में न्याय तक समान पहुँच सुनिश्चित करना सरकार और न्यायपालिका की प्राथमिकता है। स्थानीय वीएलईयों ने भी योजना की सराहना की और बताया कि अब गांव-गांव के लोग अपने निकटतम कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के माध्यम से विशेषज्ञ वकीलों से परामर्श ले पा रहे हैं।
कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कनिष्ठ लिपिक राजेश कुमार, देवेन्द्र कुमार, अभिषेक कठेरिया और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संजीव कुमार सहित समस्त पराविधिक स्वयंसेवक संविधान की प्रस्तावना का वाचन कर प्रतिभाग किया।
इस प्रकार यह कार्यक्रम ग्रामीण जनता को न्याय तक आसान और डिजिटल पहुँच प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।


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