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आर्य संस्कारशाला गुरुकुल में बसंत पंचमी पर यज्ञ व सांस्कृतिक कार्यक्रम, आचार्य संजीव रूप ने बताया ज्ञान का महत्व

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बिल्सी।
तहसील क्षेत्र के गुधनी गांव स्थित आर्य संस्कारशाला गुरुकुल में बसंत पंचमी का पर्व धार्मिक अनुष्ठानों के साथ श्रद्धा एवं उत्साहपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप द्वारा यज्ञ संपन्न कराया गया तथा बसंत पंचमी के महत्व पर प्रकाश डाला गया।
आचार्य संजीव रूप ने अपने संबोधन में कहा कि ज्ञान और शक्ति दोनों मिलकर ही राष्ट्र को समृद्ध बनाते हैं। यदि व्यक्ति के पास शक्ति है लेकिन ज्ञानपूर्वक विचार नहीं करता, तो वह असफल हो जाता है। वहीं केवल ज्ञान होने पर भी यदि शक्ति का अभाव है, तो उन्नति संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि अमेरिका, रूस, जापान, इजराइल, चीन और जर्मनी जैसे देश ज्ञान और शक्ति के उपासक हैं, इसी कारण वे समृद्ध हैं।
उन्होंने कहा कि हमें सरस्वती पूजा को केवल प्रतीकात्मक रूप में नहीं, बल्कि उसके वास्तविक अर्थ को समझना होगा। सरस्वती का मूल अर्थ ज्ञान है। हर क्षेत्र में ज्ञान अर्जित कर, उसे उन्नत बनाकर और शक्तिशाली होकर ही हम अपने भविष्य को बेहतर बना सकते हैं तथा पुनः विश्वगुरु और सोने की चिड़िया बन सकते हैं।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए, जिन्हें उपस्थित लोगों ने सराहा। इस अवसर पर आचार्य तृप्ति आर्य, तान्या, कौशिकी रानी, श्रीमती संतोष कुमारी, श्रीमती सुरजवती देवी, पंजाब सिंह, राकेश आर्य सहित अन्य लोग मौजूद रहे।


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