संवाददाता गोविन्द देवल
बदायूँ। उत्तर प्रदेश अब फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर में देश का अग्रणी निवेश हब बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प को धरातल पर उतारते हुए निवेशकों को ‘ट्रस्ट, ट्रांसफॉर्मेशन और टाइमली डिलीवरी’ की गारंटी दे रही है।
राज्य में फार्मा सेक्टर के लिए विश्वस्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर और कुशल वर्कफोर्स उपलब्ध है। सरकार निवेशकों को ‘सेफ्टी, स्टेबिलिटी और स्पीड’ (ट्रिपल एस) की सुविधा प्रदान कर रही है, जिससे औद्योगिक विकास में तेजी आ रही है।
ललितपुर में प्रदेश का पहला फार्मा पार्क स्थापित किया जा चुका है। वहीं जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास लगभग 350 एकड़ क्षेत्र में मेडिकल डिवाइस पार्क का निर्माण युद्धस्तर पर जारी है। अब तक 100 से अधिक फार्मा कंपनियां इन पार्कों से जुड़ चुकी हैं और यू.एस.एफ.डी.ए. मानक की टेस्टिंग लैब भी स्थापित की जा रही है।
शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में भी प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। लखनऊ में वर्ल्ड क्लास फार्मा इंस्टीट्यूट निर्माणाधीन है, जबकि बरेली, गौतमबुद्धनगर और पूर्वी उत्तर प्रदेश में नए फार्मा पार्क विकसित किए जा रहे हैं। आई.आई.टी. कानपुर के सहयोग से 1,200 करोड़ रुपये की लागत से ‘मेड-टेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ स्थापित किया जा रहा है। इसके अलावा लखनऊ पहले से ही सी.डी.आर.आई. और एन.बी.आर.आई. जैसी राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं का केंद्र है।
नीतिगत मोर्चे पर प्रदेश में 34 सेक्टोरियल पॉलिसीज लागू हैं, जो निवेशकों को स्पष्टता और सुरक्षा प्रदान करती हैं। सिंगल विंडो प्लेटफॉर्म के माध्यम से निवेश की प्रक्रिया सुगम है और इंसेंटिव समयबद्ध तरीके से वितरित किए जा रहे हैं। फार्मास्यूटिकल और मेडिकल डिवाइस नीति के तहत सब्सिडी, स्टांप ड्यूटी में छूट और निर्यात प्रोत्साहन की व्यवस्था है।
प्रदेश का यह विकास संतुलित और पर्यावरण-अनुकूल भी है। पिछले 9 वर्षों में भौतिक विकास के साथ-साथ फॉरेस्ट कवर में भी वृद्धि हुई है। बेहतर कनेक्टिविटी और जवाबदेह प्रशासन के दम पर उत्तर प्रदेश आज फार्मा निवेश का पसंदीदा गंतव्य बन चुका है और भारत को वैश्विक फार्मा एवं बायोफार्मा उत्पादन के केंद्र के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभा रहा है।
Budaun Amarprabhat