स्वामित्व योजना के तहत ड्रोन सर्वे से तैयार हो रहे आवासीय अभिलेख
संवाददाता: गोविंद देवल, बदायूं
उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षों से अधिकांश घरों का न तो कोई अधिकृत नक्शा था और न ही स्पष्ट स्वामित्व अभिलेख। ऐसे में भूमि और मकान को लेकर पारिवारिक व पड़ोसी विवाद, मारपीट और मुकदमेबाजी आम बात रही है। इन समस्याओं के समाधान और ग्रामीण समाज में शांति व सौहार्द बनाए रखने के उद्देश्य से भारत सरकार की स्वामित्व योजना के तहत प्रदेश सरकार ने ग्रामीण आबादी सर्वेक्षण एवं अभिलेख संक्रिया विनियमावली, 2020 लागू की है।
इस योजना के अंतर्गत ग्रामीण आबादी क्षेत्रों में स्थित भूमि, भवन और अन्य संपत्तियों का सर्वेक्षण कर गृह स्वामियों को ‘घरौनी’ (ग्रामीण आवासीय अभिलेख) प्रदान की जाती है। सर्वे प्रक्रिया की शुरुआत ग्राम सभा की बैठक से होती है, जिसमें ग्रामीणों को योजना की जानकारी दी जाती है। इसके बाद आबादी क्षेत्र में निजी, सरकारी व अर्धसरकारी भूमि और भवनों का चिन्हीकरण किया जाता है।
चिन्हीकरण के उपरांत ड्रोन तकनीक से सर्वे कर मानचित्र तैयार किया जाता है। मानचित्र के आधार पर भूखंडों की नंबरिंग कर सूची ग्राम पंचायत की बैठक में प्रकाशित की जाती है। सूची प्रकाशन के बाद उपजिलाधिकारी द्वारा आपत्तियां आमंत्रित कर उनका निस्तारण सुलह-समझौते के आधार पर किया जाता है। आवश्यकता होने पर जिलाधिकारी/जिला अभिलेख अधिकारी के समक्ष भी अपील की जा सकती है।
सभी आपत्तियों के निस्तारण के बाद गृह स्वामीवार घरौनी और संशोधित मानचित्र तैयार कर वितरित किए जाते हैं। इसके पश्चात जिलाधिकारी द्वारा शासन को अधिसूचना प्रस्ताव भेजा जाता है।
प्रदेश में नवीनतम ड्रोन तकनीक के माध्यम से कुल 1,10,344 ग्रामों को अधिसूचित किया गया है। इनमें से गैर आबाद ग्रामों को छोड़कर 90,530 ग्रामों में वास्तविक सर्वे कार्य किया जा रहा है। दिसंबर 2025 तक सभी 90,530 ग्रामों का ड्रोन सर्वे पूर्ण कर लिया गया है। अब तक 71,344 ग्रामों में 1,09,11,057 ग्रामीण आवासीय अभिलेख (घरौनी) तैयार कर वितरित किए जा चुके हैं।
योजना के तहत घरौनी मिलने से ग्रामीणों को अपने मकान का वैध स्वामित्व प्रमाण मिल रहा है, जिससे विवादों में कमी आने और ग्रामीण विकास को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
Budaun Amarprabhat