संवाददाता: गोविंद देवल, बदायूँ
बदायूँ। उत्तर प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग तेजी से औद्योगिक विकास का नया इंजन बनता जा रहा है। प्रदेश सरकार की उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के लागू होने के बाद निवेश, रोजगार और निर्यात को नई गति मिली है। नीति का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ राज्य को प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों का अग्रणी केंद्र बनाना है।
खाद्य प्रसंस्करण विभाग के अनुसार प्रदेश में असंगठित क्षेत्र के तहत करीब 3.50 लाख इकाइयाँ स्थापित और क्रियाशील हैं, जबकि संगठित क्षेत्र में 80 हजार से अधिक इकाइयाँ संचालित हो रही हैं। इनमें से 3000 से ज्यादा इकाइयों का वार्षिक टर्नओवर 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक है। यह क्षेत्र लगभग 2.55 लाख लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध करा रहा है।
सरकार का लक्ष्य प्रत्येक जनपद में 1000 नई इकाइयाँ स्थापित कर 75 हजार अतिरिक्त इकाइयाँ खड़ी करना है, जिससे कुल संख्या करीब 1.40 लाख तक पहुंचाई जा सके। प्रदेश में 15 एग्रो-फूड प्रोसेसिंग पार्क भी विकसित किए जा रहे हैं।
निजी निवेश के जरिये बड़ी कंपनियां भी प्रदेश में अपनी इकाइयाँ स्थापित कर रही हैं। इनमें Nestle India (ग्रेटर नोएडा), Haldiram’s (नोएडा/लखनऊ), Britannia Industries (बहेरी) तथा Dabur India (वाराणसी) प्रमुख हैं। हल्दी, आम, आंवला, मिर्च, नमकीन और दुग्ध प्रसंस्करण पर विशेष फोकस किया जा रहा है, जिससे उत्तर प्रदेश निर्यात के क्षेत्र में भी अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।
नीति के तहत नई इकाइयों को परियोजना लागत का 35 प्रतिशत (अधिकतम 5 करोड़ रुपये) अनुदान दिया जा रहा है। विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए 35 प्रतिशत (अधिकतम 1 करोड़ रुपये) की सहायता का प्रावधान है। कोल्ड चेन और मूल्यवर्धन इंफ्रास्ट्रक्चर पर 35 प्रतिशत तथा फ्रीजिंग सुविधा पर 50 प्रतिशत (अधिकतम 10 करोड़ रुपये) तक अनुदान उपलब्ध है।
ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने पर महिला उद्यमियों को 90 प्रतिशत और पुरुष उद्यमियों को 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। निर्यात के लिए परिवहन लागत पर 25 प्रतिशत सब्सिडी, रेफर वैन/मोबाइल यूनिट पर 5 वर्ष तक ब्याज सब्सिडी (अधिकतम 50 लाख रुपये), कृषि प्रसंस्करण क्लस्टर पर 35 प्रतिशत (अधिकतम 10 करोड़ रुपये) और फार्म गेट इंफ्रास्ट्रक्चर पर 35 प्रतिशत (अधिकतम 5 करोड़ रुपये) सहायता दी जा रही है।
भूमि से जुड़े प्रोत्साहनों में 12.5 एकड़ से अधिक कृषि भूमि खरीद की अनुमति, भूमि उपयोग परिवर्तन शुल्क में 50 प्रतिशत छूट, बाह्य विकास शुल्क में 75 प्रतिशत छूट और स्टांप शुल्क की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति शामिल है। एकल एकीकृत बाजार व्यवस्था के तहत मंडी शुल्क और उपकर में भी छूट दी जा रही है।
उद्यमी सिंगल विंडो पोर्टल निवेश मित्र के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, जिससे पारदर्शी और समयबद्ध स्वीकृति सुनिश्चित की गई है। सरकार का मानना है कि यह नीति प्रदेश को आत्मनिर्भर, रोजगारयुक्त और निर्यातोन्मुख बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है।
Budaun Amarprabhat