मस्जिदों में उमड़ी अकीदतमंदों की भीड़, इबादत और तिलावत में गुजरा दिन
संवाददाता: गोविंद देवल, बदायूं
बदायूं। मुकद्दस माह-ए-रमजान के पहले अशरे की रहमतों के बीच गुरुवार को रोजेदारों ने आठवां रोजा अकीदत और एहतराम के साथ रखा। गुरुवार का रोजा 13 घंटे 03 मिनट का रहा। सहरी के बाद रोजेदारों ने अल्लाह की रजा के लिए दिनभर सब्र और इबादत के साथ रोजा मुकम्मल किया।
रोजेदारों ने बताया कि रमजान का पहला अशरा रहमत और बरकत का होता है। इस दौरान ज्यादा से ज्यादा इबादत करने और दुआओं का एहतमाम किया जाता है, क्योंकि रोजेदार की दुआ कबूल होती है और जाया नहीं जाती। उनका कहना है कि पहला अशरा रहमत, दूसरा मगफिरत और तीसरा जहन्नम से आजादी का होता है।
उन्होंने बताया कि रमजान खैर व बरकत का महीना है। इस पाक महीने में रहमत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं, जहन्नम के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं और शैतान को जंजीरों में जकड़ दिया जाता है। नफ्ल का सवाब फर्ज के बराबर और एक फर्ज का सवाब सत्तर फर्जों के बराबर अता किया जाता है।
रोजेदारों ने बताया कि आठवां रोजा अल्लाह की इबादत में गुजरा। बंदों ने दिनभर भूखे-प्यासे रहकर इबादत की और शाम को रोजा इफ्तार किया। मस्जिदों में नमाजियों की भीड़ नजर आई। घरों और मस्जिदों में कुरआन-ए-पाक की तिलावत जारी रही। लोगों के सिर पर टोपियां और हाथों में तस्बीह दिखाई दी।
रात में तरावीह की नमाज अदा कर रोजेदारों ने अल्लाह का शुक्र अदा किया और मुल्क व कौम की सलामती की दुआ मांगी। रमजान के पहले अशरे में शहर का माहौल पूरी तरह इबादतमय नजर आ रहा है।
Budaun Amarprabhat