वाराणसी। देशभर में 4 मार्च को होली मनाई जाएगी, लेकिन धर्म नगरी वाराणसी में रंगों का उल्लास रंगभरी एकादशी से ही शुरू हो गया। बाबा के गौना के साथ आरंभ हुई काशी की होली अपने अनोखे अंदाज के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है।
काशी विश्वनाथ मंदिर से शुरू हुआ उत्सव जब हरिश्चंद्र घाट स्थित महाश्मशान पहुंचा तो नजारा अद्भुत हो उठा। धधकती चिताओं के बीच अघोरी और तांत्रिकों ने चिताओं की भस्म से होली खेली। श्मशान घाट पर गूंजते “होली खेले मसाने में” जैसे गीतों पर विदेशी सैलानी भी झूमते नजर आए।
महाश्मशान की इस अनोखी होली को देखने के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी पर्यटक पहुंचे। भूत-पिशाच के रूप में सजे कलाकारों, दम साधे खड़े साधुओं और चिताओं की राख से सजे अघोरियों के बीच सैलानी इस अद्भुत दृश्य को अपने कैमरों में कैद करते दिखे। युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिला। कई विदेशी युवतियां भी श्मशान घाट पर पारंपरिक धुनों पर थिरकती नजर आईं।
काशी की यह भस्म होली जीवन और मृत्यु के अद्वैत दर्शन का प्रतीक मानी जाती है। जहां एक ओर चिताएं जलती हैं, वहीं दूसरी ओर भस्म से रंगी होली जीवन के उत्सव का संदेश देती है। यही कारण है कि वाराणसी की महाश्मशान होली को विश्व की सबसे अनोखी होली कहा जाता है।
Budaun Amarprabhat