होली का पर्व हर वर्ष फाल्गुन पूर्णिमा को मनाया जाता है, लेकिन इस बार भद्रा और चंद्रग्रहण के कारण तारीख को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में श्रद्धालुओं के मन में सवाल है कि आखिर होलिका दहन कब करें और रंगों की होली किस दिन खेलें?
2 मार्च को ही होगा होलिका दहन
ज्योतिषाचार्य आचार्य सोहम शर्मा के अनुसार 2 मार्च की सायं 5:58 बजे के बाद पूर्णिमा तिथि प्रारंभ हो जाएगी। इसी दिन शाम 5:59 बजे से भद्रा भी लग रही है, जो रात्रि 5:29 बजे तक रहेगी।
श्री निर्णय सागर पंचांग के अनुसार यदि भद्रा निशीथ काल (मध्यरात्रि) तक रहे तो प्रदोष काल में भद्रा का मुख त्यागकर होलिका दहन करना शास्त्र सम्मत माना गया है। इस वर्ष भद्रा का मुख नहीं रहेगा, इसलिए सूर्यास्त के बाद प्रदोष बेला में ही होलिका दहन करना उचित रहेगा।
2 मार्च को सूर्यास्त का समय शाम 6:14 बजे है। इसके बाद रात 9:00 बजे तक होलिका दहन का शुभ मुहूर्त रहेगा। चूंकि 3 मार्च को पूर्णिमा 5:08 बजे तक ही रहेगी और उसी दिन चंद्रग्रहण भी है, इसलिए 2 मार्च को ही होलिका दहन करना शास्त्रसम्मत रहेगा।
3 मार्च को चंद्रग्रहण, नहीं खेली जाएगी होली
3 मार्च को खग्रास/ग्रस्तोदित चंद्रग्रहण लगेगा। ग्रहण का स्पर्श दोपहर 3:20 बजे से होगा और मोक्ष शाम 6:46 बजे होगा। भारत में ग्रहण चंद्रोदय के साथ शाम 6:14 बजे से दिखाई देगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण से 9 घंटे पूर्व सूतक काल प्रारंभ हो जाता है। ऐसे में सुबह लगभग 6:20 बजे से सूतक लग जाएगा। सूतक काल में किसी भी प्रकार का शुभ कार्य वर्जित होता है, इसलिए 3 मार्च को रंगों की होली नहीं खेली जाएगी।
4 मार्च को खेलेंगे रंगों की होली
चंद्रग्रहण और सूतक काल के कारण रंगोत्सव 4 मार्च को मनाया जाएगा। इस दिन धूमधाम से अबीर-गुलाल के साथ होली खेली जाएगी।
चंद्रग्रहण में क्या करें?
आचार्य सोहम शर्मा के अनुसार ग्रहण काल में अपने इष्ट देव के मंत्रों का जाप करना विशेष फलदायी होता है। घर के मंदिर का पट बंद रखें। गर्भवती महिलाओं को बाहर नहीं निकलना चाहिए। ग्रहण काल में चाकू से काटना-छीलना जैसे कार्य नहीं करने चाहिए।
ग्रहण के बाद करें दान
चंद्रग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करें और भगवान को स्नान कराकर नए वस्त्र धारण कराएं। चंद्रमा के निमित्त सफेद वस्तुओं का दान करना शुभ माना गया है।
होली भारतीय संस्कृति का प्रमुख पर्व है, जो प्रेम, उल्लास और एकता का प्रतीक है। इस बार पंचांग के गणित को ध्यान में रखते हुए होली का उत्सव मनाएं और परंपराओं का पालन करें।
Budaun Amarprabhat