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भूजल संरक्षण को लेकर सरकार गंभीर: प्रदेश के 44 विकासखंड अतिदोहित श्रेणी में, जल प्रबंधन को तेज किए जा रहे प्रयास

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बदायूं। प्रदेश में भूगर्भ जल संसाधनों के बढ़ते महत्व को देखते हुए इसके संरक्षण और प्रभावी प्रबंधन के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसी उद्देश्य से वर्ष 2004 में भूगर्भ जल विभाग को प्रदेश की भूजल संपदा के सर्वेक्षण, अनुसंधान, नियोजन, विकास और प्रबंधन के साथ ही भूगर्भ जल दोहन के नियंत्रण तथा संरक्षण और संचयन के लिए नोडल एजेंसी घोषित किया गया था।
भूगर्भ जल विभाग का मुख्य कार्य प्रदेश की भूजल संपदा का सर्वेक्षण, आकलन, प्रबंधन और उससे जुड़ी समस्याओं का वैज्ञानिक अध्ययन करना है। इसके साथ ही भूजल दोहन पर नियंत्रण, भूजल संरक्षण, संचयन तथा विभिन्न विभागों द्वारा चलाई जा रही रिचार्ज योजनाओं का तकनीकी समन्वय और अनुश्रवण भी विभाग की जिम्मेदारी है।
भूजल संसाधनों के नवीनतम आकलन के अनुसार प्रदेश के 75 जिलों के 826 विकासखंडों में से 44 विकासखंड अतिदोहित, 48 क्रिटिकल, 171 सेमी क्रिटिकल तथा 563 विकासखंड सुरक्षित श्रेणी में रखे गए हैं।
वित्तीय वर्ष 2024-25 में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में प्री-मानसून व पोस्ट-मानसून के दौरान भूजल स्तर मापन का कार्य पूरा कर लिया गया है। साथ ही 184 अक्रियाशील पीजोमीटर के स्थान पर नए पीजोमीटर स्थापित किए गए तथा 200 पीजोमीटर के रख-रखाव और अनुरक्षण का कार्य भी शत-प्रतिशत पूरा किया गया।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में भी 233 अक्रियाशील पीजोमीटर के स्थान पर नए पीजोमीटर स्थापित किए जा चुके हैं और 200 पीजोमीटर के रख-रखाव का कार्य भी पूरा कर लिया गया है।
भूजल संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए प्रदेश के सभी 75 जिलों में हर वर्ष 15 से 22 जुलाई के बीच “भूजल सप्ताह” मनाया जाता है। इसी क्रम में वर्ष 2025-26 में 16 से 22 जुलाई के बीच प्रदेश भर में विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से जनजागरूकता अभियान चलाया गया।
इसके अलावा बुंदेलखंड क्षेत्र में जल प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने के लिए इंडिया-इजराइल बुंदेलखंड वाटर प्रोजेक्ट भी लागू किया गया है। इस परियोजना के तहत उन्नत कृषि तकनीक, इंटीग्रेटेड ड्रिप इरीगेशन और आधुनिक जल प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से जल संरक्षण के कार्य किए जा रहे हैं। परियोजना के पहले चरण में झांसी जिले के बड़ागांव विकासखंड के गंगावली गांव में मिनी पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया गया है।
वहीं उत्तर प्रदेश अटल भूजल योजना के तहत प्रदेश के 88 अतिदोहित और क्रिटिकल विकासखंडों में वाटर सिक्योरिटी प्लान विकसित किया जा रहा है। इसके साथ ही मध्यम गहरे पीजोमीटर की स्थापना और रूफटॉप रेनवाटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा देने के लिए भी कार्य किया जा रहा है। इस योजना के तहत 56 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में रूफटॉप रेनवाटर हार्वेस्टिंग का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि भूजल संरक्षण और जल प्रबंधन को मजबूत करने के लिए सरकार लगातार योजनाएं लागू कर रही है, ताकि भविष्य में जल संकट की स्थिति से बचा जा सके।


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