नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के नेता, मुख्य सचेतक व सांसद धर्मेंद्र यादव ने बुधवार को संसद में जातीय जनगणना का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना सामाजिक, वास्तविक तथा आर्थिक आंकड़ों के संकलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसके बाद जारी अधिसूचना में पिछड़ा वर्ग से संबंधित कोई पृथक कॉलम शामिल न किया जाना आश्चर्य और चिंता का विषय है।
सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि यदि जातीय जनगणना में ही पिछड़ी जातियों का स्पष्ट वर्गीकरण नहीं होगा तो पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य ही संदिग्ध हो जाता है। उन्होंने कहा कि पिछड़ा वर्ग देश की सबसे बड़ी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है और इनके सटीक आंकड़ों के बिना न तो नीतियों का वैज्ञानिक आधार पर निर्धारण संभव है और न ही सामाजिक न्याय सुनिश्चित किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि यह स्थिति सामाजिक न्याय के संवैधानिक सिद्धांतों के विपरीत प्रतीत होती है। धर्मेंद्र यादव ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि गजट अधिसूचना में ओबीसी कॉलम को शामिल न किए जाने का तत्काल स्पष्टीकरण दिया जाए और अधिसूचना में संशोधन कर पिछड़ा वर्ग के लिए अलग कॉलम जोड़ा जाए, ताकि जातीय जनगणना का उद्देश्य पारदर्शी और प्रभावी ढंग से पूरा हो सके।
Budaun Amarprabhat