बदायूं। परिषदीय स्कूलों में मिड-डे मील बनाने का ठेका एनजीओ को दिए जाने के विरोध में प्रगतिशील रसोइया यूनियन ने गुरुवार को मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन बेसिक शिक्षा अधिकारी बदायूं के माध्यम से भेजा। ज्ञापन की एक-एक प्रति एमडीएम प्रभारी और बीएसए को भी सौंपी गई।
यूनियन की ओर से ज्ञापन बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में एमडीएम प्रभारी हिना खान को सौंपा गया। इस दौरान जरीना, रौनक, रईसा सहित कई रसोइया बहनें मौजूद रहीं। यूनियन के समर्थन में क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन और जनहित सत्याग्रह मोर्चा के पदाधिकारी भी शामिल हुए।
यूनियन की सदस्य जरीना ने बताया कि रसोइया बहनें बेहद अल्प मानदेय पर मिड-डे मील योजना के तहत बच्चों के लिए भोजन तैयार करने और परोसने का कार्य कर रही हैं। उनका प्रयास रहता है कि बच्चों को समय से स्वच्छ और मेन्यू के अनुसार भोजन उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि अब बदायूं तहसील के स्कूलों में भोजन बनाने का ठेका एनजीओ को दिए जाने से रसोइया बहनों के रोजगार पर संकट खड़ा हो गया है और कई रसोइयों को काम से हटाए जाने की खबर भी मिल रही है।
जनहित सत्याग्रह मोर्चा के अध्यक्ष प्रेमपाल सिंह ने कहा कि एक ओर देश बड़ी अर्थव्यवस्था होने का दावा कर रहा है, वहीं परिषदीय स्कूलों में भोजन बनाने वाली रसोइया बहनों को मात्र दो हजार रुपये मानदेय दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनसे भोजन बनाने के अलावा अन्य कार्य भी कराए जाते हैं, जो एक तरह से बेगार के समान है। दशकों से काम कर रही इन महिलाओं के शोषण के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष करने की आवश्यकता है।
यूनियन की प्रमुख मांगें:
सभी स्कूलों में मिड-डे मील बनाने की पुरानी व्यवस्था बहाल की जाए और स्कूलों में ही रसोइया बहनों से भोजन बनवाया जाए।
एनजीओ के माध्यम से भोजन बनवाने की व्यवस्था पर रोक लगाई जाए।
रसोइया बहनों को काम से न हटाया जाए तथा हटाई गई महिलाओं को वापस काम पर लिया जाए।
रसोइयों का मानदेय राज्य में घोषित न्यूनतम वेतन के बराबर किया जाए।
सभी रसोइया बहनों को राज्य कर्मचारी का दर्जा देकर कर्मचारियों जैसी सुविधाएं प्रदान की जाएं।
ज्ञापन के माध्यम से यूनियन ने सरकार से रसोइया बहनों के हितों की रक्षा करते हुए उचित निर्णय लेने की मांग की
Budaun Amarprabhat