बदायूं। संस्कृत महाविद्यालय वेदामऊ वैदिक विद्यापीठ बदायूं में सोमवार को ‘हिंदी दिवस’ का पावन पर्व अत्यंत धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के संस्थापक एवं भारतीय संस्कृति व संस्कृत-हिंदी के अनन्य प्रेमी वेदव्रत आर्य ने की, जबकि संचालन व्याकरण विभागाध्यक्ष आचार्य सर्वेश कुमार गुप्त द्वारा किया गया।
समारोह को संबोधित करते हुए विद्यालय के वरिष्ठ प्रवक्ता आचार्य शिव सिंह यादव ने ‘हिंदी, हिंदू, हिंदुस्तान’ के भाव को रेखांकित करते हुए अपने विचार रखे। व्याकरण विभागाध्यक्ष आचार्य सर्वेश कुमार गुप्त ने हिंदी साहित्य के इतिहास के चारों कालों आदिकाल, भक्तिकाल, रीतिकाल व आधुनिक काल पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने आधुनिक हिंदी के जनक भारतेंदु हरिश्चंद्र के जीवन और उनके प्रसिद्ध दोहे ‘निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल’ का उल्लेख करते हुए राष्ट्र की उन्नति में मातृभाषा की महत्ता समझाई।
महाविद्यालय के प्राचार्य वेद मित्र आर्य तथा पार्वती आर्य कन्या संस्कृत इंटर कॉलेज की प्रवक्ता श्रीमती सीमा जी ने हिंदी के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य और कविता पाठ के जरिए विचार साझा किए। वहीं अध्यापिका सृष्टि शर्मा, बेबी एवं अंकिता गुप्ता ने भी अपनी बात रखी।
अध्यक्षीय उद्बोधन में वेदव्रत आर्य ने बताया कि 14 सितंबर 1949 को हिंदी को राजभाषा का दर्जा मिला और 1953 से यह निरंतर दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। उन्होंने संस्कृत को हिंदी की जननी बताते हुए सभी को शुभकामनाएं दीं। अंत में शांति पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इस दौरान विद्यालय का समस्त स्टाफ उपस्थित रहा।
Budaun Amarprabhat