बदायूँ में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन

बदायूँ। जनपद न्यायालय परिसर बदायूँ में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार राष्ट्रीय लोक अदालत का भव्य आयोजन किया गया। इस अदालत का मुख्य उद्देश्य वर्षों से लंबित मुकदमों को बिना किसी कटुता के सुलह-समझौते के आधार पर खत्म कर जनता को त्वरित, सुलभ व किफायती न्याय उपलब्ध कराना है।
लोक अदालत का विधिवत शुभारंभ सुबह 10 बजे हुआ, जो शाम 5 बजे तक संचालित रही। न्यायालय परिसर में विभिन्न प्रकार के मामलों जैसे पारिवारिक विवाद, दीवानी मुकदमे, बैंक ऋण वसूली, मोटर दुर्घटना दावा और शमनीय आपराधिक वादों के निस्तारण के लिए विशेष पीठों और काउंटरों का गठन किया गया।
लोक अदालत की कार्यप्रणाली पर जानकारी देते हुए न्यायिक अधिकारी ने बताया कि लोक अदालत का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यहां मामलों का पूर्ण और स्थाई समाधान होता है। इस व्यवस्था में किसी पक्षकार की हार या जीत नहीं होती, बल्कि आपसी सहमति से विवाद खत्म किया जाता है। लोक अदालत में पारित निर्णय (अवार्ड) सिविल कोर्ट की डिक्री के समान अंतिम और बाध्यकारी होता है, जिसकी आगे किसी उच्च न्यायालय में कोई अपील नहीं होती। साथ ही, सबसे बड़ी राहत यह मिलती है कि मुकदमे के दौरान न्यायालय में जमा की गई कोर्ट फीस भी पक्षकारों को पूरी तरह वापस लौटा दी जाती है।
ट्रैफिक व आरटीओ चालानों को लेकर न्यायिक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि बदायूँ जिला क्षेत्राधिकार के अंतर्गत काटे गए सभी हाईवे, पुलिस और संभागीय परिवहन चालानों का निस्तारण केवल बदायूँ जनपद न्यायालय में ही संभव है। दूर-दराज के वादकारियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस बार डिजिटल तकनीक को बढ़ावा दिया गया है। बैंकों के सहयोग से शुरू किए गए ‘सेतु ऐप’ के माध्यम से लोग घर बैठे ही अपने चालान का ऑनलाइन निस्तारण कर सकते हैं, जिसकी राशि सीधे सरकारी ट्रेजरी में सुरक्षित रूप से जमा हो जाती है।
अक्सर आम लोगों में भ्रम रहता है कि न्यायालय आने के लिए वकील जरूरी है, परंतु लोक अदालत में ऐसी कोई अनिवार्यता नहीं रखी गई है। वादकारी स्वयं व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर या साधारण प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर अपने मामले का निपटारा करा सकते हैं। बदायूँ में आयोजित इस राष्ट्रीय लोक अदालत से सैकड़ों परिवारों और वादकारियों को अदालती चक्करों और मानसिक तनाव से स्थायी मुक्ति मिली।
Budaun Amarprabhat