सारे संसार की मैं खुशी वार दूं।
दो जहां से भी ज्यादा तुझे प्यार दूं।
तूने पावन की मेरी हरिक सांस है।
जिंदगी की मेरी तू ही तो आस है।
तेरा अहसान है जो संभाला मुझे।
सिंधु से रंजोगम के निकाला मुझे।
मेरे जीवन के सब तुझको अधिकार दूं
मित्रता मैं मुझे इक रतन मिल गया।
घाव नासूर था जाने कब सिल गया।
तू है स्वर मेरे जीवन के संगीत का।
और मुखड़ा ह्रदय के हरिक गीत का।
प्रेम से पूर्ण रिश्तों का संसार दूं।
तू ही जीवन में खुशियों की बरसात है।
रब की भेजी हुई मुझको सौगात है।
स्याह से आशियां की तू है रोशनी।
दिन का सूरज है तू रात की चांदनी।
तेरे कदमों में जन्नत बिछा यार दूं
नाम लेते ही मन का ये गुलशन खिले।
हर घड़ी हर जगह तू ही तू बस मिले
सोचता हूं कि कुछ ऐसा कर जाऊं मैं।
मर के भी अब न तुझसे बिछड़ पाऊं मैं।
जन्मों जन्मों तलक होगा जिसका असर।
दोस्ती अपनी हो जाए ऐसी अमर।
ऐसा क्या मैं तुझे आज उपहार दूं?
कवि सुधीर यादव
कासगंज(यू पी.)
Budaun Amarprabhat