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मन में न थी धारणा न कोई अवधारणा , जो मिला पाकर उसे हम मुस्कुरा लिए।

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#हम मुस्कुरा लिए

दर्द ने जकड़ा या ग़म ने ठोकर लगायी ,
ज़िंदगी जब कभी भी आजमाने पे आयी ,
मन में न थी धारणा न कोई अवधारणा ,
जो मिला पाकर उसे हम मुस्कुरा लिए।

आशीष छाँव दे रही ,धूप ने सेकन लगायी,
हर लम्हा प्यारा लगा, कमी नज़र में न आयी ,
हर हाल की खासियत, मेरा है वो बस मेरा ,
हर ग़म से पल ख़ुशी के हम चुरा लिए ।

पुष्प अधरों पे खिले ,झड़ी अँखियों ने लगायी ,
मर्म समझूँ बात का ,समझ ने समझ बनायी ,
प्यार या फटकार जो भी मिला न गिला ,
अश्रु -अश्रु समेटे दीवाने हम बढ़ लिए ।

स्याह रात हो चाहे ,उम्मीद सुबह ने जगायी ,
कुछ तो कर ही लेंगे ,सोच ये मन में आयी ,
हम हैं , ये क्या कम है ,रख मन में हौंसला ,
हर अदा पर ज़िंदगी से प्यार, हम कर लिए।

©अलका बलूनी पंत
दिल्ली


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