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कमीशनखोरी व अनियमितताओं के चलते पुल पर भविष्य में हादसे का खतरा

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कमीशन का बोलबाला, सच्चाई का मुंह काला
सेतु निगम के जीएम ने नियमों को रखा ताक में, अनुभवहीन फर्म को दे दिया पुल का ठेका
अनुभवहीन ठेकेदार द्वारा पुल निर्माण कार्य में बरती जा रहीं हैं भारी अनियमितताएं
कमीशनखोरी व अनियमितताओं के चलते पुल पर भविष्य में हादसे का खतरा
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भले ही भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति रखते हों, लेकिन उनकी अफ़सरशाही बेखौफ हो भ्रष्टाचार की बैसाखी पर निर्माण कार्य कराने में मशगूल है।
उत्तर प्रदेश में सेतु निगम को परवाह नहीं कि उनका रवैया कल किसी हादसे को जन्म दे सकता है। ऐसा ही एक मामला बदायूं का है जहां सेतु निगम के भ्रष्ठ अधिकारियों ने सारे नियमों को ताक में रख अनुभवहीन ठेकेदार फर्म मेघेन्द्रपाल सिंह को हाइवे पर बड़े पुल के निर्माण का ठेका दे दिया है। इस पूरे मामले की हमारे प्रतिनिधि द्वारा मौके पर जाकर पड़ताल की गई।
उप्र सेतु निगम द्वितीय खंड बरेली मंडल द्वारा ठेके पर बदायूं जनपद में एक पुल का निर्माण कार्य किया जा रहा है, यह पुल शाहबाद-बिसौली-कासगंज हाइवे पर सोत नदी पर बनाया जा रहा है। इसको बनाने का ठेका एक ऐसे ठेकेदार को दिया गया है जिसने इससे पहले किसी भी प्रकार के दीर्घ सेतु का कोई पुल नहीं बनाया है, जबकि पीडब्ल्यूडी की गाइड लाइन एवं बिड की एसओपी में स्पष्ट लिखा हुआ है कि बिना वेल या पाइल फाउंडेशन के अनुभव के ऐसे किसी दीर्घ सेतु के निर्माण हेतु ठेकेदार अपात्र माना जाएगा। लेकिन बदायूं के शाहबाद-बिसौली-कासगंज हाइवे पर रानेट चौराहे के पास सोत नदी पर बन रहे पुल का ठेका मेघेन्द्र पाल सिंह फर्म को दे दिया गया है जिनके पास केवल छोटी व जर्जर पुल-पुलियों की मरम्मत कार्य का ही अनुभव है। अब तक उक्त ठेकेदार द्वारा कोई दीर्घ पुल नहीं बनबाया गया है।
इस मामले में सेतु निगम के महाप्रबंधक केएन ओझा एवं परियोजना प्रबंधक अरूण गुप्ता द्वारा जान बूझकर कमीशनखोरी करके ऐसी फर्म की निविदा को स्वीकृत किया गया है जिसको नीव पायलिंग एवं वेल फाउंडेशन का कोई अनुभव ही नहीं है और न ही उसने बिड में सम्मिलित किए गए अपने अनुभव प्रमाण पत्रों में ऐसा कोई अनुभव लगाया है। ऐसे में सेतु निगम के बिड की एसओपी तथा लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता के आदेशों की धज्जियां उड़ाई गई हैं। वहीं स्थानीय और अनुभवी लोगों का कहना है कि ये पुल भी शीघ्र ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगा। वहीं ठेकेदार द्वारा मौके पर पायलिंग का कार्य भी गुणवत्तापूर्वक नहीं किया जा रहा है। पायलिंग की गहराई पूरी नहीं की जा रही है व जंग लगा सरिया प्रयोग किया जा रहा है। वहीं ठेकेदार द्वारा बेल में लाइनर भी पूर्णरूप से नहीं डाला जा रहा है। सीमेन्ट का ब्रांड एवं गिट्टी बालू भी मानक के अनुकूल नहीं करके गुणवत्ता भी प्रभावित की जा रही है। मौके पर जाकर जब हमारे प्रतिनिधि ने कार्य को देखा तो यहां पर सुरक्षा मानकों को ताक में रख कर कार्य किया जा रहा है। वर्करों की सुरक्षा के लिहाज़ से कोई इंतजाम नहीं हैं। वर्करों पर जैकट, हेल्मेट, सुरक्षा बेल्ट आदि नहीं दी गई हैं। जगह-जगह बिजली बायरिंग भी कटी-फटी अवस्था में जमीन पर लोहे की सरिया के पास खुली बिछी हुई है, जो कभी भी किसी बड़े हादसे को जन्म दे सकती है। कोई खतरे का बोर्ड नहीं लगाया गया है, पीयू बॉक्स में कार्य से भिन्न गुणवत्ता भरी जा रही थी।
सेतु निगम बरेली द्वितीय की कार्यशैली के बारे में गहनता से जानकारी करने पर ज्ञात हुआ कि उप्र राज्य सेतु निगम द्वितीय में जमकर कमीशनखोरी होती है और सरकार के धन का खूब बंदरबांट किया जाता है। ज्ञात हुआ है कि जीएम व प्रोजेक्ट मैनेजर द्वारा सेतु हो या ओवरब्रिज का साइड काम हो, इसके बर्क आर्डर जारी कर छोटी छोटी फर्मों से मोटी कमीशन पर काम कराया जाता है। स्टोन क्रेशर हल्द्वानी के बिल लगाते हैं जबकि स्टोन बाजपुर क्रेशर का डलवाया जाता है। पत्थर और उसके साइज में गड़बड़ी की जाती है। इतना ही नहीं जानबूझकर कार्य में शिथिलता बरतने के बाद स्टीमेट को रिवाइज किया जाता है और सरकार के धन का अफसर और ठेकेदार मिलकर बंदरबांट कर लेते हैं। इससे लगता है कि शाहबाद-बिसौली-कासगंज हाइवे पर बनने वाला 128 मीटर लंबा पुल जिसकी लागत करोड़ों रूपये की है। इस पुल पर भी इसी कार्यशैली से निर्माण कार्य हो रहा है तो ऐसे में संभावना कम नहीं होगी कि यह पुल मियाद से पहले ही धराशाई हो जाए।


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