बदायूं।
गिंदो देवी महिला महाविद्यालय में समाजशास्त्र विभाग की ओर से प्राचार्या प्रो. सरला देवी चक्रवर्ती के निर्देशन में सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों के अंतर्गत मंगलवार को एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार का विषय ‘युवा, संस्कृति और वैश्वीकरण’ रहा। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की आराधना एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुई।
प्राचार्या प्रो. सरला देवी चक्रवर्ती ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि “युवा वायु की तरह है—ऊर्जा, गति और संभावनाओं से भरा हुआ। युवा ही देश का भविष्य और संस्कृति का सच्चा वाहक है।” उन्होंने बदलते वैश्विक परिवेश में संस्कृति के संरक्षण को आवश्यक बताया।
चीफ प्रॉक्टर प्रो. इंदु शर्मा ने वैदिक काल के गृहस्थ आश्रम की महत्ता पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति सदैव संतुलन, अनुशासन और कर्तव्यबोध की प्रतिनिधि रही है।
समाजशास्त्र विभाग की डॉ. शिल्पी तोमर ने संस्कृति को एक हस्तांतरणीय प्रक्रिया बताते हुए कहा कि संस्कृति पीढ़ी दर पीढ़ी मूल्य, परंपरा और अनुभव के रूप में प्रवाहित होती है।
बीए प्रथम वर्ष की छात्रा प्रतीक्षा ने संस्कृति के मूल्यों को न भूलने का आग्रह किया, वहीं कार्यक्रम संचालक डॉ. इति अधिकारी ने संस्कृति को चरित्र और व्यवहार का दर्पण बताया।
रानी लक्ष्मीबाई जयंती के अवसर पर बीए प्रथम वर्ष की छात्रा साक्षी ने सुभद्रा कुमारी चौहान की प्रसिद्ध कविता का ओजपूर्ण पाठ कर सभागार में उत्साह का संचार किया।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. शिल्पी तोमर ने सभी प्रतिभागियों एवं अतिथियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर डॉ. सोनी मौर्य, डॉ. उमा सिंह, डॉ. प्रीति, डॉ. वंदना, डॉ. अवनिशा, डॉ. निशा, डॉ. अनीता और डॉ. पूनम सहित समस्त शिक्षिकाओं ने अपनी सक्रिय उपस्थिति व विचार प्रस्तुत किए।
महाविद्यालय परिवार की व्यापक सहभागिता से कार्यक्रम सफल रहा।
Budaun Amarprabhat