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उत्तर प्रदेश में न्यायिक व्यवस्था सशक्त बनाने के लिए बड़े कदम

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बदायूँ, 03 दिसंबर। उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यायिक व्यवस्था को और सशक्त बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। सरकार ने विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के छात्रों को डिजिटल प्लेटफॉर्म, ई-कोर्ट प्रणाली, अल्टरनेटिव डिस्प्यूट रेजोल्यूशन और साइबर लॉ जैसे उभरते क्षेत्रों में विशेष प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की है।

न्यायिक प्रशिक्षण और अनुसंधान संस्थान में नए हॉस्टल, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और आधुनिक प्रशिक्षण कक्षाओं का निर्माण कराया जा रहा है। इसके अलावा न्यायिक अधिकारियों, प्रॉसिक्यूटर्स, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का निरंतर प्रशिक्षण और स्किल डेवलपमेंट सुनिश्चित किया जा रहा है।

आजादी के अमृतकाल के प्रथम वर्ष में तीन नए कानून—भारतीय न्याय संहिता-2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम-2023 लागू किए गए हैं। सरकार बेंच और बार के बेहतर समन्वय के लिए इन्टीग्रेटेड कोर्ट परिसर का निर्माण कर रही है। इसके तहत 10 जनपदों के लिए एक साथ धनराशि जारी की गई है, जिसमें जिले स्तर के सभी कोर्ट और बार के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

प्रदेश में महिलाओं और बच्चों से संबंधित अपराधों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए 380 से अधिक पॉक्सो और फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए गए हैं। लोक अदालत, मीडिएशन और आर्बिट्रेशन के माध्यम से भी त्वरित न्याय उपलब्ध कराया जा रहा है।

इसके अतिरिक्त, राज्य स्तर पर यूपी स्टेट फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट का गठन किया गया है, और इंटर ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम को सशक्त बनाने के लिए ई-कोर्ट, ई-पुलिसिंग, ई-प्रॉसीक्यूशन, ई-फॉरेंसिक और ई-प्रिजन को एकीकृत किया जा रहा है।

सरकार का मानना है कि इन व्यवस्थाओं से न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रिया में तेजी आएगी और हर व्यक्ति को पारदर्शी व कुशल न्याय सुनिश्चित होगा।

संवादाता: गोविंद देवल


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