
बिल्सी। तहसील क्षेत्र के गांव गड़रपुरा में आयोजित सात दिवसीय बुद्ध कथा के चौथे दिन भगवान बुद्ध के धम्म चक्र प्रवर्तन के महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई। कथावाचक राजेश्वरी बौद्ध ने बताया कि भगवान बुद्ध ने सारनाथ में प्रथम उपदेश देकर संसार को दुख से मुक्ति का मार्ग दिखाया।
उन्होंने कहा कि बुद्ध का धम्म केवल एक धर्म नहीं, बल्कि करुणा, अहिंसा और सम्यक आचरण के माध्यम से जीवन को सही दिशा देने वाली जीवन पद्धति है। धम्म चक्र प्रवर्तन का अर्थ ज्ञान का प्रचार और अज्ञान का नाश है। भगवान बुद्ध का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना उनके समय में था। वर्तमान समाज में बढ़ती हिंसा, असहिष्णुता और तनाव से मुक्ति पाने के लिए बुद्ध के विचारों को अपनाना आवश्यक है।
कथावाचक श्याम सुंदर बौद्ध ने भगवान बुद्ध के चार आर्य सत्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि दुख मानव जीवन का सत्य है और उससे मुक्ति के लिए अष्टांगिक मार्ग को अपनाना जरूरी है। उन्होंने बताया कि इच्छाएं, तृष्णा और अहंकार ही दुखों का मुख्य कारण हैं। यदि व्यक्ति बुद्ध के बताए मार्ग पर चले तो जीवन में शांति, संतोष और आत्मिक सुख की प्राप्ति हो सकती है।
कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। श्रद्धालुओं ने बुद्ध वंदना कर कथा का श्रवण किया और धम्म के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर हरवीर शाक्य, चंद्रपाल, किशन पाल, मोहनलाल, हरविलास, पान सिंह, सुनील कुमार, श्यामवीर, रामवीर, शिशुपाल सहित अनेक लोग मौजूद रहे।
Budaun Amarprabhat