लखनऊ में गुप्त बैठक, उपेक्षा पर फूटा गुस्सा; फंड बैंक और मजबूत चेहरा उभारने का प्लान
आशीष सिंह
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में जातीय समीकरण एक बार फिर उबाल पर हैं। ठाकुर और कुर्मी समाज के बाद अब ब्राह्मण नेता भी एकजुट हो रहे हैं। 23 दिसंबर को लखनऊ में भाजपा सहित विभिन्न दलों के करीब 35-40 ब्राह्मण विधायकों और एमएलसी की गुप्त बैठक ने योगी सरकार के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है। बैठक बाहर से ‘सहभोज’ का नाम देकर आयोजित की गई, जहां लिट्टी-चोखा और फलाहार परोसा गया, लेकिन अंदर की चर्चा ब्राह्मण समाज की राजनीतिक उपेक्षा, सामाजिक अन्याय और भविष्य की रणनीति पर केंद्रित रही।यह बैठक कुशीनगर से भाजपा विधायक पंचानंद पाठक (पी.एन. पाठक) के सरकारी आवास पर हुई।
-
- ठाकुरों के बाद अब ब्राह्मणों में असंतोष, भाजपा को 2027 से पहले बड़ा झटका?
- बैठक में 46 में से कई भाजपा ब्राह्मण विधायक शामिल, विपक्ष को मौका
- पीड़ित ब्राह्मण परिवारों को आर्थिक मदद, समाज में एकजुटता का संकल्प
- जनवरी में अगली बैठक, राज्यव्यापी महासम्मेलन की तैयारी
- केशव मौर्य बोले- इसे जातीय चश्मे से न देखें, सिर्फ स्नेह मिलन
मुख्य रूप से पूर्वांचल और बुंदेलखंड के ब्राह्मण नेता इसमें शामिल हुए। विधायकों का कहना था कि जाति आधारित राजनीति में ठाकुर, पिछड़े और दलित समाज तो सशक्त हो गए, लेकिन ब्राह्मणों की आवाज दबाई जा रही है। हाल की घटनाओं – लखनऊ, कानपुर, भदोही, गोंडा और बहराइच के प्रयागपुर में ब्राह्मणों के साथ हुए कथित अन्याय – का जिक्र कर विधायकों ने गुस्सा जताया। बैठक में कई ठोस फैसले लिए गए।
ब्राह्मण समाज के गरीब और पीड़ित परिवारों की मदद के लिए ‘फंड बैंक’ बनाया जाएगा, जिसमें रिटायर्ड जज, ब्यूरोक्रेट्स, डॉक्टर और प्रभावशाली लोगों को जोड़ा जाएगा। अगर कहीं ब्राह्मणों पर अन्याय होता है या मौत होती है, तो पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता दी जाएगी। राजनीतिक हिस्सेदारी पर जोर देते हुए संख्या के अनुपात में उचित प्रतिनिधित्व की मांग की जाएगी। सबसे महत्वपूर्ण – ब्राह्मण समाज का एक मजबूत और बड़ा चेहरा उभारा जाएगा, इस पर सभी की सहमति बनी।यूपी विधानसभा में कुल 52 ब्राह्मण विधायक हैं, जिनमें से 46 भाजपा के हैं। बैठक में ज्यादातर भाजपा के ही नेता शामिल थे, लेकिन अन्य दलों के ब्राह्मण चेहरे भी पहुंचे।
प्रमुख नामों में मेजबान पी.एन. पाठक, बांदा के प्रकाश द्विवेदी, गोंडा तरबगंज के प्रेम नारायण पांडे, मेहनौन के विनय द्विवेदी, बदलापुर के रमेश मिश्र, देवरिया के डॉ. शलभमणि त्रिपाठी, मिर्जापुर के रत्नाकर मिश्र, एमएलसी साकेत मिश्र, अंकुर राज तिवारी, बाबूलाल तिवारी समेत कई शामिल रहे।उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बैठक को सामान्य बताया और कहा कि विधायक सत्र के दौरान मिलते रहते हैं, इसे जातीय चश्मे से नहीं देखना चाहिए। लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे भाजपा के लिए खतरे की घंटी माना जा रहा है। ब्राह्मण वोट बैंक (12-14% आबादी) यूपी में निर्णायक रहा है। 2017 और 2022 में भाजपा को इसका बड़ा फायदा मिला, लेकिन अब उपेक्षा की शिकायतें जोर पकड़ रही हैं।जनवरी में अगली बैठक और 2026 में राज्यव्यापी ब्राह्मण महासम्मेलन की तैयारी है। विपक्ष, खासकर समाजवादी पार्टी, इस गोलबंदी को भुनाने की फिराक में है। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले जातीय समीकरण कितने बदलते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा।
Budaun Amarprabhat