संवाददाता गोविंद देवल
बिल्सी तहसील (बदायूं)।
बिल्सी तहसील के ग्राम पिंडौल स्थित पुराने शिव मंदिर, होली चौक में चल रही राम कथा के चौथे दिन श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना रहा। परम श्रद्धेय पंडित गौरव देव शर्मा के मुखारविंद से भगवान श्रीराम के जन्म की कथा एवं जन्म के उपरांत चारों भाइयों के नामकरण संस्कार का विस्तार से वर्णन किया गया।
कथा व्यास ने बताया कि भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का नामकरण संस्कार महर्षि वशिष्ठ द्वारा विधि-विधान से सम्पन्न कराया गया था। राम को ‘रामचन्द्र’, लक्ष्मण को ‘लक्ष्मण’, भरत को ‘भरत’ और शत्रुघ्न को ‘शत्रुघ्न’ नाम प्रदान किए गए। यह नामकरण संस्कार सनातन धर्म के सोलह संस्कारों में से एक महत्वपूर्ण संस्कार है, जिसमें शुभ मुहूर्त में पूजन-अर्चन कर बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की जाती है।
पंडित गौरव देव शर्मा ने बताया कि दशरथ के ज्येष्ठ पुत्र का नाम ‘राम’ रखा गया, जिसका अर्थ ब्रह्मांड में व्याप्त तत्व से है, जो प्रकाश और चेतना का प्रतीक है। लक्ष्मण को यह नाम उनके शुभ लक्षणों एवं राम के प्रति अटूट प्रेम के कारण मिला, वहीं उन्हें शेषनाग का अवतार भी बताया गया। भरत और शत्रुघ्न का नामकरण भी महर्षि वशिष्ठ ने किया, और चारों भाइयों के परस्पर प्रेम को चारों वेदों के समान बताया गया।
कथा के दौरान भगवान राम की बाल लीलाओं का भी अत्यंत रोचक और भावपूर्ण वर्णन किया गया, जिसे सुनकर श्रोता भावविभोर हो उठे। अंत में राम आरती के साथ कथा का समापन हुआ और उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
Budaun Amarprabhat