बदायूं। आवास विकास स्थित राजकीय महाविद्यालय बदायूं में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) की रानी लक्ष्मी बाई इकाई के सात दिवसीय विशेष शिविर के चतुर्थ दिवस की शुरुआत प्रातःकालीन प्रार्थना, लक्ष्य गीत और अभ्यास के साथ हुई।
प्रातःकालीन सत्र में सरोजिनी नायडू और रानी लक्ष्मी बाई टोली की स्वयंसेविकाओं ने स्लोगन लेखन कर ग्रामीण क्षेत्र में जागरूकता रैली निकाली। इस दौरान ग्रामीणों को विभिन्न सामाजिक और सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक किया गया। वहीं इंदिरा गांधी, सरस्वती और अहिल्याबाई टोली की छात्राओं ने ग्रामीणों के रोजगार से जुड़े सर्वेक्षण किए तथा कम संसाधनों में जीवनयापन और उनकी प्रमुख समस्याओं के बारे में जानकारी ली।
स्वयंसेविकाओं ने ग्रामीणों को किसान फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा), प्रधानमंत्री आवास योजना और आयुष्मान भारत योजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कुछ छात्राओं ने ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं के लिए आवेदन लिखने की प्रक्रिया भी समझाई।
कार्यक्रम अधिकारी डॉ. ज्योति विश्नोई ने कहा कि देश का भविष्य युवाओं के हाथों में है और कौशल विकास युवाओं को अपने सपनों को साकार करने के साथ-साथ व्यक्तित्व विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
बौद्धिक सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में गिनदो देवी महिला महाविद्यालय की सहायक प्रोफेसर डॉ. शुभी भसीन ने अंग्रेजी भाषा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी भाषा करियर उन्नति में सहायक होती है, विशेषकर जॉब इंटरव्यू, प्रेजेंटेशन और नेटवर्किंग में इसकी अहम भूमिका है। उन्होंने छात्राओं को अंग्रेजी बोलने और पढ़ने के लिए प्रेरित किया।
विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित सहायक प्रोफेसर डॉ. पूनम सिंह ने छात्राओं को आत्मनिर्भर बनने का संदेश देते हुए नृत्य, संगीत, शिल्पकला, कुकिंग, सिलाई-कढ़ाई जैसे क्षेत्रों में भी करियर बनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि छात्राओं को मन लगाकर पढ़ाई करनी चाहिए और उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने का संकल्प लेना चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में कार्यक्रम अधिकारी डॉ. ज्योति विश्नोई ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर सलोनी, अंशिका, वैष्णो देवी, आरती, भावना सागर, संगीता पाल, शिवानी, मुस्कान, साहिबा, काजल, सोनी, श्रद्धा कुमारी, मोहिका सहित अन्य स्वयंसेविकाएं उपस्थित रहीं।
Budaun Amarprabhat