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नवसंवत्सर पर बालाजी पुरम में गूंजे वेदमंत्र, गायत्री महायज्ञ से वातावरण हुआ पावन

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उझानी। नवसंवत्सर विक्रम संवत 2083 एवं चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर बालाजी पुरम स्थित दुर्वेश के निवास पर श्रद्धा, आस्था और वैदिक परंपरा के साथ एक कुंडीय गायत्री महायज्ञ का आयोजन किया गया। वेदमंत्रों के उच्चारण के साथ संपन्न हुए इस महायज्ञ से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो उठा।
गायत्री परिवार के संजीव कुमार शर्मा ने विधि-विधान के साथ यज्ञ संपन्न कराया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यज्ञ भारतीय संस्कृति की मूल आत्मा है, जो मानव जीवन को शुद्ध, संतुलित और सकारात्मक बनाने का वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक माध्यम है। यज्ञ से जहां वातावरण की शुद्धि होती है, वहीं नकारात्मक शक्तियों का नाश होकर मन, बुद्धि और आत्मा का परिष्कार होता है।
उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में यज्ञ का विशेष महत्व है, जो “इदं न मम” की भावना सिखाता है—अर्थात अपने स्वार्थ का त्याग कर समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए कार्य करना ही यज्ञ का वास्तविक उद्देश्य है। आज के समय में जहां देश युद्ध के बल पर विजय की सोच रखते हैं, वहीं श्रेष्ठ संस्कारों की शक्ति से लोगों के दिल जीते जा सकते हैं।
इस महायज्ञ में दुर्वेश कुमार सपत्नीक मुख्य यजमान रहे। श्रद्धालुओं ने विश्व कल्याण की कामना के साथ गायत्री मंत्र एवं महामृत्युंजय मंत्र की विशेष आहुतियां समर्पित कीं।
कार्यक्रम में निर्मला देवी, यादवेंद्र, हर्षवर्धन, शिखा सिंह, अंश सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।


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