बदायूँ। शिक्षा के अधिकार अधिनियम के अंतर्गत टीईटी उत्तीर्ण करने की बाध्यता के विरोध में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ लामबंद हो गया है। शनिवार को टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय सचिव संजीव शर्मा के नेतृत्व में शिक्षक संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने आँवला सांसद नीरज मौर्या से मुलाकात कर उन्हें अपनी व्यथा से अवगत कराया और इस अनिवार्यता को समाप्त करने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा।
संघ के प्रतिनिधिमंडल ने सांसद को बताया कि न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में शिक्षकों के लिए 31 अगस्त 2028 तक टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है। जिला अध्यक्ष एवं प्रांतीय प्रचार मंत्री संजीव शर्मा ने इस नीति पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि हमारे बीच ऐसे कई शिक्षक हैं जो पिछले 25 से 30 वर्षों से शिक्षा जगत में अपनी निष्ठापूर्ण सेवाएं दे रहे हैं। इस उम्र में और इतने लंबे अनुभव के बाद टीईटी की अनिवार्यता थोपना उनके सम्मान, आजीविका और भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
जिला महामंत्री उदयवीर सिंह यादव ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नौकरी जाने की आशंका ने शिक्षकों और उनके परिवारों को गहरे मानसिक दबाव में डाल दिया है। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि केंद्र सरकार या तो अध्यादेश लाए या संसद में संशोधन विधेयक पेश कर आरटीई लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से पूर्ण छूट प्रदान करे, ताकि वे बिना किसी भय के राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दे सकें।
शिक्षकों की पीड़ा सुनने के बाद सांसद नीरज मौर्या ने आश्वस्त किया कि वे शिक्षकों के हितों के प्रति सदैव संवेदनशील रहे हैं। उन्होंने कहा शिक्षक समाज के निर्माता हैं और उनके भविष्य पर कोई अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। मैं इस मुद्दे को संसद के पटल पर पुरजोर तरीके से उठाऊँगा ताकि शिक्षकों को इस संकट से मुक्ति मिल सके।
इस अवसर पर जिला महामंत्री उदयवीर सिंह यादव, जिला कोषाध्यक्ष सुशील चौधरी समेत तहसील स्तर के अनेक पदाधिकारी मौजूद रहे। इनमें बिल्सी से राधेश्याम, सहसवान से इकबाल अहमद, सदर से प्रीति राठौर, दामोदर सिंह यादव, अरविंद दीक्षित, डॉ. यतेंद्र निवास शर्मा, मधुकर उपाध्याय, अनुज शर्मा, दिनेश मिश्रा, सलमान खान, सुरेंद्र सिंह पटेल, डॉ. पंकज शर्मा, राजेश कुमार, संजय यादव, अशोक यादव, बृजेश यादव, आयुष भारद्वाज, रीना राठौर, श्वेता आर्य, अर्चना शंखधार, नीति आनंद, अर्चना वार्ष्णेय, सरिता चौहान, सपना और नीरज समेत समस्त विकास क्षेत्रों के अध्यक्ष, मंत्री, कोषाध्यक्ष और संघर्ष समिति के पदाधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
Budaun Amarprabhat