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उत्तम मार्दव धर्म की भावना से सराबोर हुआ टीएमयू का जिनालय

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दशलक्षण महापर्व के द्वितीय दिवस पर पूजन, आरती, भक्तामर पाठ और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां

मुरादाबाद। तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय- टीएमयू, मुरादाबाद में अनादि निधन दश लक्षण महापर्व के द्वितीय दिवस को उत्तम मार्दव धर्म की भावना के साथ श्रद्धा, भक्ति और उल्लासपूर्वक मनाया गया। विश्वविद्यालय परिसर स्थित जिनालय में आयोजित धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में विद्यार्थियों, फैकल्टी सदस्यों, विश्वविद्यालय परिवार एवं श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। पूरे जिनालय परिसर में दिनभर भक्ति, आध्यात्मिकता और धार्मिक आस्था का वातावरण बना रहा। भगवान के अभिषेक का शुभारंभ संजय जैन, विपिन जैन, डीन मैनेजमेंट, टीएमयू के कुलपति प्रो. वी. के. जैन एवं डॉ. रवि जैन द्वारा स्वर्ण कलश से इन्द्रों के रूप में किया गया। इसके पश्चात रजत झारी से शांतिधारा करने का सौभाग्य डॉ. अक्षय जैन ने प्राप्त किया। वहीं स्वर्ण झारी से शांतिधारा का पुण्य पुष्प, नैतिक, तरुण, मुकुल, मृदुल, आशु एवं अनिमेष जैन ने प्राप्त किया। साथ ही तनिष्का, हीरल, गार्गी, केवली, पलक, अविशा और विधि जैन को अष्ट प्रातिहार्य बनकर चंवर ढुलाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। दशलक्षण महापर्व के द्वितीय दिवस पर एक हजार से अधिक विद्यार्थियों ने श्रद्धापूर्वक पूजन-अर्चन में भाग लिया। देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए विद्यार्थियों और श्रद्धालुओं की सहभागिता ने जिनालय परिसर को भक्तिमय बना दिया। पूजन के उपरांत भगवान महावीर, पंच परमेष्ठी एवं शांतिनाथ भगवान की आरती की गई।

दूसरी ओर संध्या काल में कॉलेज ऑफ कंप्यूटिंग साइंसेज एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी- सीसीएसआईटी के विद्यार्थियों एवं फैकल्टी सदस्यों द्वारा जिनालय से श्रीजी की आरती को ढोल-नगाड़ों की धुन पर नाचते-गाते और भक्ति में झूमते हुए रिद्धि-सिद्धि भवन तक लाया गया। इस अवसर पर वाइस प्रिंसिपल प्रो. अशोक कुमार, प्रो. प्रशांत कुमार, डॉ. आदित्य जैन, श्रीमती निकिता जैन सहित सीसीएसआईटी के सभी फैकल्टी सदस्य एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। रिद्धि-सिद्धि भवन में श्रद्धालुओं ने भगवान महावीर की आरती, पंच परमेष्ठी की आरती तथा शांतिनाथ भगवान की आरती श्रद्धापूर्वक की। इसके पश्चात भक्ति संध्या का आयोजन हुआ, जिसमें रंगमा रंगमा रे…, भगति में होकर मगन नाचूं मैं आज छम-छम-छम, मेरी तो पतंग उड़ गई रे…, ये धर्म है आत्म ज्ञानी का… तथा जब मन न लगे कहीं, टीएमयू चले आना… जैसे भजनों पर विद्यार्थी एवं फैकल्टी भक्ति में सराबोर होकर झूम उठे।


इसके बाद भक्तामर स्तोत्र का पाठ पंडित ऋषभ शास्त्री जी द्वारा कराया गया। अपने प्रवचन में पंडित ऋषभ शास्त्री ने अपने प्रेरणादायी प्रवचन में पंडित ऋषभ शास्त्री जी ने उत्तम क्षमा धर्म की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि क्षमा का भाव केवल पर्व विशेष तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे अपने जीवन और व्यवहार का हिस्सा बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मनुष्य प्रायः दूसरों द्वारा कहे गए कटु शब्दों और किए गए व्यवहार को अपने हृदय में धारण कर लेता है, जिससे मन में अशांति बनी रहती है। ऐसे में क्षमा का भाव व्यक्ति को मानसिक शांति और आत्मिक शुद्धता प्रदान करता है। एक भिखारी का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि जब कोई व्यक्ति हमारी अपेक्षा के अनुरूप व्यवहार नहीं करता अथवा हमारे प्रति कठोर शब्दों का प्रयोग करता है, तो हम अक्सर उन शब्दों को अपने मन में धारण कर लेते हैं। परिणामस्वरूप न तो हम स्वयं शांत रह पाते हैं और न ही हमारे संबंध सहज रह पाते हैं। उन्होंने प्रेरणा देते हुए कहा कि दूसरों द्वारा कहे गए कटु शब्दों को मन में बैठाकर रखना स्वयं के लिए पीड़ा का कारण बन जाता है। इसलिए जीवन में क्षमा, विनम्रता और सकारात्मक दृष्टिकोण को अपनाना आवश्यक है।


धार्मिक आयोजनों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आकर्षण का केंद्र रहे। टीएमयू ऑडिटोरियम में इंजीनियरिंग एवं कंप्यूटर साइंस कॉलेज की छात्राओं ने “आचार्य समन्तभद्र की गाथा” पर आधारित प्रभावशाली सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। विद्यार्थियों की प्रस्तुति ने जैन दर्शन, आध्यात्मिक मूल्यों और जैन सांस्कृतिक परंपरा को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में दीप प्रज्वलन एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अक्षत जैन, श्रीमती जाह्नवी जैन, वरिष्ठ मैनेजमेंट के द्वारा किया गया। इस दौरान टीएमयू के कुलाधिपति परिवार, कुलपति परिवार, विश्वविद्यालय के फैकल्टी सदस्य एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के समापन अवसर पर टीएमयू के कुलपति प्रो. वी. के. जैन एवं वाइस प्रिंसिपल द्वारा इंजीनियरिंग एवं कंप्यूटर साइंस कॉलेज के फाइनल ईयर विद्यार्थियों को फेयरवेल दी गई। साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रतिभाग करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में टीएमयू के कुलाधिपति सुरेश जैन, ग्रुप वाइस चेयरमैन मनीष जैन, एवं श्रीमती रिचा जैन सहित विश्वविद्यालय परिवार से प्रो. विपिन जैन, डॉ. विपिन जैन, प्रो. एस. के. जैन, मनोज जैन, डॉ. विनोद कुमार जैन, डॉ. आदित्य जैन, डॉ. रवि जैन, डॉ. अक्षय जैन, वैभव जैन, डॉ. कल्पना जैन, डॉ. नीलिमा जैन, अहिंसा जैन, श्रीमती निकिता जैन, श्रीमती स्वाति जैन, श्रीमती आरजू जैन, डॉ. अर्चना जैन, श्रीमती आरती जैन, श्रीमती सुनिधि जैन एवं डॉ. चारुल जैन सहित बड़ी संख्या में फैकल्टी सदस्य एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।


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