सहसवान: श्री बांके बिहारी मन्दिर जहांगीराबाद में चल रही श्रीमद भागवत कथा के पांचवें दिन कथा व्यास पंडित हर्षित उपाध्याय ने गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया और कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की प्रत्येक लीला, प्रत्येक कर्म अपने आप में कुछ विशेष संदेश लिये हैं।
सात वर्ष के कन्हैया ने सात दिनों तक सात कोसीय गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी ऊंगली पर उठाया। गोवर्धन धारण लीला करके भगवान श्रीकृष्ण ने मानवमात्र को संदेश दिया कि मानव जीवन कठिनाइयों और चुनौतियों से भरा पड़ा है। दृढ़ संकल्प और मजबूत इच्छाशक्ति के बल पर छोटे से कन्हैया ने बड़ी ही निर्भीकता और सुगमता के साथ उस विशाल गोवर्धन पर्वत को उठा लिया। जीवन की समस्याएं भले ही पहाड़ जितनी विशाल हों लेकिन अपने आत्मविश्वास को डिगाए बिना मजबूत इच्छाशक्ति के साथ उसका सामना किया जाए तो हम पायेंगे कि बड़े ही आसानी से उसका निराकरण भी हो सकता है।
कथा व्यास ने भगवान शिव के बारे में बताते हुए कहा भोले नाथ से सीखें कि संग्रह से जीवन मूल्यवान नहीं बनता है। भगवान शिव इसलिए नहीं पूजे जाते कि उनके पास स्वर्ण भंडार भरे पड़े हैं, अपितु इसलिए पूजे जाते हैं कि स्वर्ण लंका का दान करने की सामर्थ्य रखने पर भी वो खुले आसमान के नीचे जीवन जीते हैं। स्वयं माँ अन्नपूर्णा के स्वामी होने पर भी जो पकवान और मिष्ठान नहीं अपितु फल-फूल व पत्तों का रसपान कर अपना जीवन निर्वहन करते हैं। परहित, परोपकार एवं परमार्थ भगवान शिव के जीवन का मूल है। भगवान शिव का त्याग हमें यह सन्देश देता है कि संग्रह आपको सुख साधन तो उपलब्ध करायेगा पर शांति अथवा प्रसन्नता कभी भी नहीं दे पायेगा। कथा में मुख्य यजमान दीपान्शु माहेश्वरी, उषा माहेश्वरी, राम प्रकाश उपाध्याय, कुक्कु माहेश्वरी, शुभांकर शर्मा, कल्पना शर्मा, संतोष गाँधी, ज्योति माहेश्वरी, दक्ष माहेश्वरी आदि मौजूद रहे।
संवाददाता डाo राशिद अली खान सहसवान बदायूं
Budaun Amarprabhat