वेद ईश्वर की वाणी है जो सृष्टि के आदि में प्राप्त हुई : आचार्य संजीव रूप
बिल्सी। तहसील क्षेत्र के गांव गुधनी स्थित प्रज्ञा यज्ञ मंदिर में आर्य समाज की ओर से सात दिवसीय वेद कथा का शुभांरभ किया गया। पहले दिन वेद कथा बजाते हुए वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप ने कहा कि वेद भगवान की वाणी है जो आदि सृष्टि में हम सबको प्राप्त हुई। भगवान ने इस दुनिया को बनाया और फिर इस दुनिया में कैसे रहना है क्या करना है क्या नहीं करना है इसका ज्ञान हमें दिया। उसी ज्ञान को वेद कहते हैं। वेद का एक और अर्थ है विचार अर्थात जो भी कम करें विचार पूर्वक करें कि जो काम हम कर रहे हैं उसका लाभ क्या होगा और हानि क्या होगी। कई बार हम वर्तमान में लाभ देख लेते हैं किंतु भविष्य की हानि हमें दिखाई नहीं देती। जो लोग वर्तमान कर्म भविष्य के परिणाम पर विचार करके करते हैं वे ही जानो ईश्वर की आज्ञा का पालन करते हैं और सुखी रहते हैं। आचार्य संजीव रूप ने कहा परमात्मा हमें कभी भी गलत काम की शिक्षा नहीं देता वह तो सदा शुभ काम करने की ही शिक्षा देता है। इससे पूर्व भजन गायक प्रश्रय आर्य, मास्टर रामसेवक, अशोक पाल सिंह, कौशिकी आर्य, कमलेश कुमारी, तृप्ति शास्त्री ने भजन प्रस्तुत किए। कथा का शुभारंभ अनुज कुमार सिंह कठेरिया तथा डॉक्टर बद्री प्रसाद आर्य ने दीप प्रज्वलित करके किया। इस मौके पर बद्री प्रसाद आर्य, राकेश आर्य, विशेष आर्य, जयप्रकाश आर्य, नेमपाल कोहली, अवनेश पाल सिंह, सरोज देवी, गुड्डू देवी, दुर्वेश कुमार सिंह, अनुज कुमार सिंह आदि मौजूद रहे।
Budaun Amarprabhat