बिसौली। श्रीमद् भागवत कथा के विश्राम दिवस पर कथा वाचिका अंबिका देवी जी द्वारा भगवान के विवाह प्रसंग की कथा का गुणगान किया। श्री कृष्ण रुक्मणी विवाह प्रसंग सुनकर श्रोता मंत्र मुग्ध हो गए। विवाह गीत पंडाल में गूंजने लगे। कथा वाचिका अंबिका देवी द्वारा श्री कृष्ण सुदामा चरित्र का वर्णन किया गया भगवान की सुदामा जी से मित्रता देखकर पूरी द्वारका पुरी अचंभित हो रही थी अपने मित्र का आगमन सुनकर भगवान नंगे पैरों दौड़ पड़े पीतांबर शरीर से गिर गया द्वार पर सुदामा जी को गले लगाया, महल में लाकर सिंहासन पर बैठाया और प्रेम के आंसुओं से सुदामा जी के चरण धोए पानी परात को हाथ छुओ नहीं नैनन के जल से पग दोहे देख सुदामा की दीन दशा करुणा करके करुणा निधि रोए कथा मैं बताया भगवान को बचपन की गुरुकुल की सुदामा जी से मित्रता की यादें ताजा हो गई कैसे साथ खेलते थे कैसे जंगल में लकड़ी बिनने जाते थे कैसे साथ साथ गुरुजी से शिक्षा ग्रहण करते थे भगवान कृष्ण सुदामा जी से हाल-चाल पूछते हैं सुदामा जी संकोच बस अपनी दिन दशा को नहीं बताते हैं लेकिन भगवान समझ जाते हैं कि यह परम भक्त है इसको धन संपत्ति का कोई लालच नहीं है केवल भजन कीर्तन प्रभु चर्चा मैं समय व्यतीत करने वाले हैं भगवान ने बिना मांगे ही सुदामा जी को बहुत सुख सुविधा ऐश्वर्य प्रदान किया सुदामा जी द्वारा लाए हुए एक मुट्ठी चावल को भगवान प्रेम से खा रहे हैं
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