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सहसवान, बदायूँ: सरकारी आवास योजना में पक्षपात, गरीब परिवार झोपड़ी में ठिठुरते हुए जीवन–मरण के संकट से जूझ रहा

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संवाददाता: डॉ. राशिद अली खान
सहसवान। तहसील क्षेत्र के ग्राम भीकमपुर टप्पा जामनी में सरकारी आवास योजनाओं की हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। कड़ाके की ठंड के बीच गांव की एक जर्जर झोपड़ी में रह रहे एक गरीब परिवार को ठंड, बीमारी और आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है।
गांव के इस झोपड़ी में रहने वाली शहाना अपने दो छोटे बच्चों और गंभीर रूप से बीमार पति की देखभाल कर रही हैं। पति की बीमारी के कारण वे काम करने में असमर्थ हैं और इलाज की कमी ने परिवार की आर्थिक स्थिति को और दयनीय बना दिया है। सर्द रातों में न पक्की छत है, न ठंड से बचने का कोई साधन।
प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत हुए सर्वे में शहाना ने अपना नाम दर्ज कराया था, लेकिन जब अंतिम सूची जारी हुई, तो उनका नाम गायब मिला। आरोप है कि पहले से पक्के मकान वाले या ग्राम प्रधान से नजदीकी रखने वाले परिवारों को योजना का लाभ दे दिया गया, जबकि वास्तव में जरूरतमंद आज भी झोपड़ी में रहने को मजबूर हैं।
शहाना ने बताया कि ठंड के कारण बच्चों की हालत बिगड़ रही है और पति की बीमारी लगातार गंभीर होती जा रही है। हर रात यह डर बना रहता है कि कहीं कोई अनहोनी न हो जाए। परिवार ने कई बार संबंधित अधिकारियों और ग्राम प्रधान से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
शहाना का आरोप है कि आवास योजना में खुलेआम पक्षपात किया गया और ग्राम प्रधान ने अपने चहेतों को प्राथमिकता दी। जरूरतमंदों की आवाज़ फाइलों और कागज़ों में दबकर रह गई है।
यह मामला न केवल एक परिवार की पीड़ा को उजागर करता है बल्कि सरकारी योजनाओं के निष्पक्ष क्रियान्वयन पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है। अब सवाल यह है कि प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारी ऐसे परिवारों की सुध लेंगे या शहाना जैसे लोग यूं ही झोपड़ी में ठंड, बीमारी और बेबसी के साथ जीवन यापन करते रहेंगे।


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