लखनऊ। बुधवार आधी रात के साथ राजधानी पुलिस नए वर्ष में कदम रखेगी, लेकिन बीते सालों का अनुभव बताता है कि आने वाला वक्त पुलिस के लिए आसान नहीं होगा। तेजी से बढ़ती आपराधिक घटनाओं ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्ष 2024 के आंकड़ों को पीछे छोड़ते हुए 2025 अपराध के लिहाज से रिकॉर्ड तोड़ साल साबित हुआ है। ऐसे में 2026 में पुलिस प्रशासन को कहीं अधिक सतर्क और सक्रिय रहने की जरूरत होगी।
बीते वर्ष की शुरुआत से लेकर 31 दिसंबर तक राजधानी में हत्याओं का आंकड़ा सौ के पार पहुंच गया। वहीं चोरी, लूट, अपहरण और बलवे जैसी वारदातों में भी चिंताजनक बढ़ोतरी दर्ज की गई। साल के अंतिम पड़ाव पर एक ही दिन में चार हत्याओं की घटनाओं ने पुलिस की सतर्कता पर सवाल खड़े करते हुए अपराधियों के हौसले बुलंद होने का संकेत दिया।
हालांकि वर्ष 2025 में राजधानी पुलिस को आधुनिक कंट्रोल रूम, सीसीटीवी कैमरों और अन्य अत्याधुनिक संसाधनों की सौगात मिली, लेकिन इनका प्रभाव अपराध पर कितना पड़ सका, यह साफ तौर पर नजर नहीं आया। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि 2026 में पुलिस इन संसाधनों का कितना प्रभावी उपयोग कर पाती है।
पुलिस ने वर्ष भर में कई बदमाशों को मुठभेड़ों के दौरान गिरफ्तार किया और कई अपराधियों पर सख्त कार्रवाई भी की, इसके बावजूद शहरी इलाकों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक अपराधियों का दबदबा बना रहा। यही नहीं, 2025 में आपराधिक मानसिकता के लोगों का आतंक भी लगातार चर्चा में रहा।
नए साल की शुरुआत के साथ ही राजधानी पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपराध पर अंकुश लगाने और आमजन में सुरक्षा का भरोसा कायम करने की होगी। अब देखना यह है कि अनुभव, तकनीक और रणनीति के सहारे पुलिस 2026 में कानून-व्यवस्था को किस हद तक पटरी पर ला पाती है।