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मैरिज रजिस्ट्रेशन क्यों है ज़रूरी? जानिए नए नियम, प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेज

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विवाह केवल सामाजिक बंधन नहीं, बल्कि एक कानूनी अनुबंध भी है। इस अनुबंध का एकमात्र वैध प्रमाण विवाह प्रमाण पत्र (Marriage Certificate) होता है। बदलते समय के साथ सरकार ने विवाह पंजीकरण को और अधिक सख्त व डिजिटल बना दिया है, ताकि फर्जी शादियों और कानूनी विवादों पर रोक लगाई जा सके।
मैरिज रजिस्ट्रेशन का महत्व
विवाह प्रमाण पत्र की आवश्यकता कई अहम कार्यों में पड़ती है—
पासपोर्ट और वीजा: विदेश यात्रा या स्पाउज वीजा के लिए अनिवार्य
बैंक और बीमा: ज्वाइंट अकाउंट खोलने व बीमा पॉलिसी में नॉमिनी जोड़ने के लिए
कानूनी अधिकार: संपत्ति के उत्तराधिकार, तलाक की स्थिति में गुजारा भत्ता और बच्चों की कस्टडी के मामलों में
धोखाधड़ी से बचाव: दूसरी शादी (बिगैमी) जैसी अवैध गतिविधियों पर रोक
नाम परिवर्तन: शादी के बाद सरकारी दस्तावेजों में नाम या सरनेम बदलवाने के लिए
रजिस्ट्रार के नए नियम (2025 अपडेट)
हाल के वर्षों में विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया में कई बदलाव किए गए हैं—
निवास स्थान के आधार पर पंजीकरण: अब रजिस्ट्रेशन उसी जिले में होगा, जहाँ वर या वधु का स्थायी निवास है
परिवार की उपस्थिति अनिवार्य: उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में पंजीकरण के समय परिवार के किसी सदस्य की मौजूदगी जरूरी
ऑनलाइन वेरिफिकेशन: आधार आधारित KYC, डिजिटल सिग्नेचर और ऑनलाइन आवेदन अनिवार्य
वीडियो रिकॉर्डिंग: विशेष मामलों में रजिस्ट्रार कार्यालय में बयान की वीडियो रिकॉर्डिंग
उत्तराखंड में UCC नियम: शादी के 6 महीने के भीतर पंजीकरण जरूरी, देरी पर जुर्माने का प्रावधान
मैरिज रजिस्ट्रेशन के लिए आवश्यक दस्तावेज
विवाह पंजीकरण के समय निम्नलिखित कागजात जरूरी होते हैं—
✔ पति-पत्नी द्वारा हस्ताक्षरित संयुक्त आवेदन पत्र
✔ आयु प्रमाण: 10वीं की मार्कशीट या जन्म प्रमाण पत्र
(वर की आयु 21 वर्ष और वधु की आयु 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए)
✔ पहचान प्रमाण: आधार कार्ड, वोटर आईडी या पासपोर्ट
✔ निवास प्रमाण: बिजली बिल, राशन कार्ड या रेंट एग्रीमेंट
✔ शादी का प्रमाण: विवाह कार्ड या धार्मिक स्थल से जारी प्रमाण पत्र
✔ फोटोग्राफ्स: पासपोर्ट साइज फोटो और शादी की 2–3 संयुक्त तस्वीरें
✔ दो गवाह: उनके आधार कार्ड और फोटो के साथ
✔ शपथ पत्र (एफिडेविट): विवाह की तारीख, स्थान और वैवाहिक स्थिति का विवरण
विशेष नोट: यदि पति या पत्नी की पहले शादी हो चुकी है, तो तलाक का आदेश (Divorce Decree) या पूर्व जीवनसाथी का मृत्यु प्रमाण पत्र अनिवार्य होगा।
निष्कर्ष:
मैरिज रजिस्ट्रेशन न केवल कानूनी सुरक्षा देता है, बल्कि भविष्य में आने वाली कई परेशानियों से भी बचाता है। इसलिए शादी के बाद बिना देरी किए विवाह पंजीकरण कराना हर दंपती के लिए बेहद जरूरी है।


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