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पिंडौल में श्रीराम कथा के तीसरे दिन शिव-पार्वती विवाह प्रसंग का वर्णन, पाणिग्रहण संस्कार का बताया महत्व

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संवाददाता: गोविंद देवल
बिल्सी (बदायूँ)। बिल्सी तहसील के ग्राम पिंडौल में आयोजित श्रीराम कथा के तीसरे दिन कथा व्यास परम श्रद्धेय पंडित श्री गौरव देव शर्मा ने भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। इस दौरान उन्होंने पाणिग्रहण संस्कार के महत्व को विस्तार से समझाया।
कथा के दौरान पंडित गौरव देव शर्मा ने कहा कि पाणिग्रहण संस्कार वर-वधू के बीच एक पवित्र और सार्वजनिक प्रतिज्ञा है। इस संस्कार में वर, वधू का हाथ पकड़कर जीवन भर उसकी जिम्मेदारी निभाने, सुख-दुःख में साथ रहने और धार्मिक व समृद्ध दांपत्य जीवन जीने का संकल्प लेता है। यही संस्कार विवाह को अटूट बंधन प्रदान करता है।
उन्होंने बताया कि पाणिग्रहण संस्कार हिन्दू धर्म के 16 संस्कारों में से एक महत्वपूर्ण संस्कार है, जो विवाह को आध्यात्मिक और मनोवैज्ञानिक आधार देता है। सप्तपदी के साथ मिलकर यह संस्कार विवाह को पूर्णता प्रदान करता है।
कथा व्यास ने कहा कि पाणिग्रहण केवल शारीरिक संबंध नहीं, बल्कि दो आत्माओं के मिलन का प्रतीक है। यह संस्कार पति-पत्नी के बीच अटूट विश्वास, प्रेम और समर्पण को दर्शाता है, जिससे दांपत्य जीवन मधुर और सफल बनता है।
कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति भाव में डूबे रहे और शिव-पार्वती विवाह प्रसंग को सुनकर वातावरण भक्तिमय हो गया।


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