बदायूं संवाददाता गोविंद देवल
सामाजिक न्याय, समानता और पिछड़े वर्गों के अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष करने वाले भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर की 102वीं जयंती बुधवार को बदायूं जनपद के लोची नगला मोहल्ले में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी और स्थानीय नागरिक शामिल हुए। सभी ने कर्पूरी ठाकुर के विचारों को आत्मसात करने और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कमल जीत भूरानी ने कहा कि जननायक कर्पूरी ठाकुर स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षक और सादगीपूर्ण जीवन जीने वाले महान नेता थे। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत शिक्षक के रूप में की और बाद में बिहार की राजनीति में एक मजबूत स्तंभ बनकर उभरे। वे एक बार बिहार के उपमुख्यमंत्री और दो बार मुख्यमंत्री रहे। सत्ता को सेवा का माध्यम मानते हुए उन्होंने समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक न्याय पहुंचाने का कार्य किया।
कमल जीत भूरानी ने बताया कि कर्पूरी ठाकुर का जन्म बिहार के समस्तीपुर जिले में हुआ था। उनका पूरा जीवन पिछड़े, दलित और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित रहा। उनके अतुलनीय योगदान को सम्मान देते हुए भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया, जो उनके संघर्ष और विचारधारा की ऐतिहासिक स्वीकृति है।
कार्यक्रम में हिरदेश चंद्र माथुर ने कर्पूरी ठाकुर के सामाजिक दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका जीवन सामाजिक न्याय और समानता के सिद्धांतों पर आधारित था। उन्होंने कहा था, “जब तक समाज में समता नहीं आएगी, तब तक विकास अधूरा है।” वहीं उनका प्रसिद्ध नारा—
“100 में 25 हमारा है, 100 में 25 हमारा है, बाकी पर भी नाम हमारा है”
आज भी सामाजिक चेतना को जागृत करता है।
हिरदेश माथुर ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर को ‘जननायक’ इसलिए कहा गया क्योंकि वे आम जनता की आवाज थे और सत्ता के शिखर पर रहते हुए भी जमीन से जुड़े रहे।
कार्यक्रम में कुलदीप श्रीवास्तव, विकास श्रीवास्तव, जुगेंद्र श्रीवास्तव, अनिल, राजू श्रीवास्तव, ओमप्रकाश श्रीवास्तव, राजेंद्र पाल, अमित राठौर सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने कर्पूरी ठाकुर के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि
Budaun Amarprabhat