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रमजान में फितरा देने के सही हकदारों को लेकर इमाम ने किया जागरूक

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गरीबों, अनाथों और मदरसे के छात्रों तक ही फितरा पहुंचाने की अपील
संवाददाता: डॉ. राशिद अली खान, सहसवान (बदायूं)
सहसवान में इबादत और बरकतों के महीने रमजान के बीच फितरा और जकात देने का सिलसिला तेज हो गया है। मोहल्ला शहवाजपुर स्थित जामा मस्जिद के इमाम कारी खलीक उरहमान उर्फ बाबू मौलाना ने मुस्लिम समुदाय को सही हकदारों तक फितरा पहुंचाने के लिए जागरूक किया है।
इमाम साहब ने बताया कि फितरा इस्लाम में अनिवार्य दान है, जिसका उद्देश्य गरीबों को मदद देना और उन्हें ईद की खुशियों में शामिल करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फितरा केवल इन लोगों को देना जायज है:
बेवा औरतें: जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं।
मिसकीन और जरूरतमंद: जिनके पास रोजमर्रा के लिए पर्याप्त साधन नहीं हैं।
यतीम बच्चे: अनाथ बच्चे जिनकी देखभाल के लिए कोई सहारा नहीं है।
मदरसे के छात्र: जो दीनी तालीम और कुरान पढ़ रहे हैं।
इमाम साहब ने लोगों को चेताया कि रमजान में फितरा इकट्ठा करने के नाम पर सक्रिय माफियाओं से सावधान रहें। उन्होंने कहा कि फितरा अल्लाह की तरफ से गरीबों का हक है, इसे सही जगह पहुंचाना हर मुसलमान की जिम्मेदारी है। उन्होंने समुदाय से अपील की कि वे अपना फितरा सोच-समझकर और जांच-परख कर ही सही हकदारों को दें, ताकि गाढ़ी कमाई वास्तव में किसी जरूरतमंद के काम आ सके।
फितरा सही तरीके से देने से न केवल समाज में खुशहाली बढ़ती है, बल्कि बच्चों, अनाथों और गरीबों के जीवन में वास्तविक राहत भी पहुंचती है।


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