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संवाददाता: गोविन्द देवल
बदायूं। होली को पर्यावरण शुद्धि दिवस के रूप में मनाने की मुहिम चला रहे आर्य समाज के अंतरराष्ट्रीय वैदिक विद्वान व समाज सुधारक आचार्य संजीव रूप इन दिनों जनपद भर में 42 जड़ी-बूटियों से युक्त उत्तम हवन सामग्री निःशुल्क वितरित कर रहे हैं। उनका उद्देश्य समाज को जागरूक कर होली के पर्व को शुद्ध, सात्विक और पर्यावरण हितैषी स्वरूप में मनाने के लिए प्रेरित करना है।
आचार्य संजीव रूप का कहना है कि होली एक पवित्र यज्ञ है, जिसे सामूहिक रूप से एक स्थान पर पुरुषों द्वारा और घर-घर में माताएं-बहनें बलगुरिया जलाकर मनाती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि होली में हरे पेड़ काटकर डालना, चोरी की लकड़ी जलाना या प्लास्टिक, गंदे कपड़े जैसी अपवित्र वस्तुएं डालना अधार्मिक और पाप है। इससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचता है।
उन्होंने बताया कि प्रत्येक परिवार को अपने घर से उपले और थोड़ी सूखी लकड़ी लाकर उसमें शुद्ध सामग्री, सरसों का तेल और देशी घी समर्पित करना चाहिए। इससे वातावरण शुद्ध होता है और ऋतु परिवर्तन के समय फैलने वाले रोगों के बैक्टीरिया व वायरस नष्ट होते हैं। साथ ही उन्होंने शराब और रासायनिक रंगों से होली न खेलने की भी अपील की।
आचार्य संजीव रूप ने बदायूं प्रवास के दौरान सदर विधायक महेश गुप्ता, भाजपा नेता प्रेम स्वरूप पाठक, बिल्सी विधायक हरीश शाक्य, पुलिस अधीक्षक ब्रजेश कुमार तथा जिलाधिकारी अवनीश राय सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों को सामग्री भेंट कर उसका महत्व बताया।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2012 से वह इस अभियान में सक्रिय हैं और अब तक प्रदेश व देश के अनेक स्थानों पर लोगों को प्रेरित कर चुके हैं। उनकी प्रेरणा से कई जगहों पर लोग होली में शुद्ध हवन सामग्री का प्रयोग कर रहे हैं।
आचार्य ने बताया कि बबराला, बिल्सी, इस्लामनगर और बदायूं सहित 50 से अधिक गांवों में अब तक सामग्री वितरित की जा चुकी है। अभी लगभग 5000 पैकेट और वितरित किए जाने हैं।
इस अनूठी पहल को जनपद में सराहना मिल रही है और लोग पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ होली मनाने के लिए प्रेरित हो रहे
Budaun Amarprabhat