महाराजा अग्रसेन कॉलेज बरेली में आयोजित संगोष्ठी में प्रस्तुत किया शोध पत्र; महाविद्यालय परिवार ने दी बधाई
असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शुभ्रा शुक्ला के निर्देशन में छात्र ने छूए कैंसर के अनछुए पहलू, प्राचार्य ने थपथपाई पीठ
सहसवान। क्षेत्र के संघटक राजकीय महाविद्यालय के बीएससी चतुर्थ सेमेस्टर के मेधावी छात्र माही पंडित ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर संस्थान व क्षेत्र का नाम रोशन किया है। महाराजा अग्रसेन कॉलेज, बरेली द्वारा आयोजित एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में माही पंडित ने बेहतरीन पेपर प्रेजेंटेशन (शोध पत्र प्रस्तुति) देकर सर्वश्रेष्ठ अवार्ड अपने नाम किया है। छात्र की इस बड़ी उपलब्धि पर महाविद्यालय में खुशी की लहर दौड़ गई और स्टाफ ने उसे मिठाई खिलाकर उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
महाविद्यालय की बॉटनी (वनस्पति विज्ञान) विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शुभ्रा शुक्ला के कुशल निर्देशन में बीएससी के छात्र माही पंडित ने “जैनेटिक कैंसर कॉजेस एंड प्रिवेंशन” (आनुवंशिक कैंसर: कारण और बचाव) जैसे गंभीर विषय पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया था। डॉ. शुभ्रा शुक्ला ने बताया कि माही ने अपने प्रेजेंटेशन में आज के आधुनिक युग में तेजी से बढ़ते जेनेटिक कैंसर के मामलों और उनके अनछुए पहलुओं को बहुत ही वैज्ञानिक व सरल ढंग से दुनिया के सामने रखा, जिसकी अंतरराष्ट्रीय जूरी ने खूब सराहना की।
प्राचार्य डॉ. गुरुदीप सिंह उप्पल कहा कि जीवन में निरंतर आगे बढ़ने के लिए विद्यार्थियों को किताबी पढ़ाई के साथ-साथ शोध और अन्य क्षेत्रों में भी हाथ आजमाना चाहिए। इस प्रकार की अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस विद्यार्थियों के ज्ञान का विस्तार करने और उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होती हैं। माही ने अन्य छात्रों के लिए एक मिसाल पेश की है।
माही पंडित की इस शानदार अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि पर कॉलेज के समस्त प्राध्यापकों ने उसे बधाई दी और अन्य छात्र-छात्राओं को इससे प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
बधाई देने वाले प्रमुख शिक्षाविद असिस्टेंट प्रोफेसर (हिन्दी) डॉ. शुभ्रा माहेश्वरी, डॉ. सौरभ नागर, डॉ. रजनी गुप्ता, डॉ. नीति सक्सेना, डॉ. नवीन कुमार, डॉ. राजेश सिंह, डॉ. सुरजीत सिंह मौर्य, डॉ. टेकचंद, डॉ. पारुल अग्रवाल, डॉ. सूर्य प्रताप गौतम एवं डॉ. ब्रह्मस्वरूप शामिल थे।
समारोह के अंत में समस्त स्टाफ और सहपाठियों ने माही को उसकी इस अभूतपूर्व सफलता के लिए बधाई देते हुए कहा कि ग्रामीण अंचल के विद्यार्थियों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, बस उन्हें सही मार्गदर्शन और मंच मिलने की आवश्यकता है।
Budaun Amarprabhat