बदायूं, गुरु पूर्णिमा के अवसर पर 29 जुलाई की रात आसमान में वर्ष की आकर्षक पूर्णिमा ‘बक मून’ दिखाई देगा। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि भारतीय समयानुसार रात 8:06 बजे पूर्णिमा अपने चरम पर होगी। इस दौरान चंद्रमा मकर (कैप्रिकॉर्नस) तारामंडल की दिशा में रहेगा और लगभग –12.7 मैग्नीट्यूड की चमक के साथ दमकेगा। इस बार गुरु पूर्णिमा और बक मून का संयोग इसे खगोलीय और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष बना रहा है।
उन्होंने बताया कि सूर्यास्त के बाद चंद्रमा पूर्व-दक्षिण-पूर्व दिशा में दिखाई देगा और रात बढ़ने के साथ आकाश में ऊपर उठता जाएगा। पूर्णिमा के समय पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा लगभग एक सीध में होते हैं, जिससे चंद्रमा का पूरा प्रकाशित भाग पृथ्वी से दिखाई देता है।
अमर पाल सिंह के अनुसार जुलाई की पूर्णिमा को ‘बक मून’ नाम उत्तरी अमेरिका की मूल निवासी जनजातियों ने दिया था, क्योंकि इसी समय नर हिरणों के नए सींग विकसित होने लगते हैं। इसे थंडर मून, हे मून और रास्पबेरी मून जैसे अन्य नामों से भी जाना जाता है।
उन्होंने बताया कि पूर्णिमा के समय समुद्र में उच्च ज्वार (स्प्रिंग टाइड) आता है, लेकिन वैज्ञानिक अध्ययनों में मानव व्यवहार पर चंद्रमा का कोई प्रत्यक्ष प्रभाव सिद्ध नहीं हुआ है। वहीं हर पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण नहीं होता, क्योंकि चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी की कक्षा से लगभग 5.1 डिग्री झुकी हुई है।
खगोलविद ने बताया कि इस पूर्णिमा को देखने के लिए किसी दूरबीन की आवश्यकता नहीं है। साफ मौसम में सूर्यास्त के बाद खुली जगह से इसका सुंदर नजारा देखा जा सकता है। यदि फोटो लेना चाहें तो ट्राइपॉड का उपयोग करें और कैमरे का एक्सपोजर कम रखें, जिससे चंद्रमा की सतह स्पष्ट दिखाई दे।
उन्होंने लोगों से अपील की कि गुरु पूर्णिमा की चांदनी रात का आनंद लेने के साथ बच्चों को इसके वैज्ञानिक और सांस्कृतिक महत्व से भी अवगत कराएं, ताकि समाज में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा मिल सके।
Budaun Amarprabhat