बदायूं। पुलिस महानिदेशक के आदेशानुसार संचालित महत्वाकांक्षी ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान के तहत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के कुशल पर्यवेक्षण और प्रभावी पैरवी के परिणामस्वरूप न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में अभियुक्त को दोषी करार देते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास और कुल 45,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
थाना सहसवान पर वर्ष 2010 में मुकदमा अपराध संख्या 1885/10 (धारा 363, 366, 376 भादवि) दर्ज किया गया था। यह मामला निम्नलिखित पांच अभियुक्तों के विरुद्ध पंजीकृत हुआ था।
इस मामले की विवेचना तत्कालीन विवेचक निरीक्षक अशोक कुमार सिंह द्वारा पूरी कर न्यायालय एडीजे/एफटीसी प्रथम/सीएडब्ल्यू कोर्ट में आरोप पत्र (चार्जशीट) प्रेषित किया गया था।
इस अभियोग को डीजीपी उत्तर प्रदेश के ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ अभियान के तहत चिन्हित किया गया था। अभियोजन विभाग से समन्वय स्थापित करते हुए मॉनीटरिंग सेल बदायूं और पैरोकार आरक्षी रामेन्द्र कुमार द्वारा न्यायालय में सशक्त और प्रभावी पैरवी की गई।
आज न्यायालय एडीजे/एफटीसी प्रथम/सीएडब्ल्यू कोर्ट द्वारा सुनवाई पूरी करते हुए फैसला सुनाया गया। धारा 363 भादवि के तहत दोषसिद्ध अभियुक्त अनीस अहमद को 05 वर्ष का कठोर कारावास एवं 10,000 रुपये का अर्थदंड दिया गया। अर्थदंड न देने पर 15 दिवस का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। धारा 366 भादवि के तहत अभियुक्त अनीस अहमद को 07 वर्ष का कठोर कारावास एवं 10,000 रुपये का अर्थदंड दिया गया। अर्थदंड न अदा करने पर 15 दिवस का साधारण कारावास भुगतना होगा। धारा 376 भादवि के तहत अभियुक्त अनीस अहमद को 10 वर्ष का कठोर कारावास एवं 25,000 रुपये का अर्थदंड दिया गया। अर्थदंड न देने पर 02 माह का साधारण कारावास भुगतना होगा।
अदालत द्वारा सभी सजाएं साथ-साथ चलने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, अन्य शेष अभियुक्तगण—अबरार, शकील, असरार और आलेहसन को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया है।
इस न्यायपूर्ण निर्णय को दिलाने में पैरोकार कांस्टेबल रामेन्द्र कुमार, विवेचक निरीक्षक अशोक कुमार सिंह तथा अपर जिला शासकीय अधिवक्ता मदन लाल राजपूत की भूमिका और पैरवी सराहनीय रही। पुलिस की इस पैरवी से महिला अपराधों से जुड़े मामलों में अपराधियों में कड़ा संदेश गया है।
Budaun Amarprabhat