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सोमवती अमावस्या पर गूंजे काव्य सुर, कवियों ने रचनाओं से मोहा मन

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शिव आदर्श शिक्षा सदन में सजी मासिक काव्यगोष्ठी; मंदाकिनी साहित्य मंच की पुस्तक विमोचन पर भी हुआ मंथन
उसहैत। सोमवती अमावस्या के पावन पर्व पर उसावां स्थित शिव आदर्श शिक्षा सदन उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के परिसर में मासिक काव्यगोष्ठी का गरिमामयी आयोजन किया गया। गोष्ठी में क्षेत्र के तमाम लब्धप्रतिष्ठित कवियों और शायरों ने शिरकत की और अपनी मर्मस्पर्शी रचनाओं, गीतों व गज़लों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता उसहैत के वरिष्ठ कवि नंदकिशोर पाठक ने की, जबकि कुशल मंच संचालन अमित अंबर द्वारा किया गया। गोष्ठी का विधिवत शुभारंभ संतोष कुमार सिंह की मधुर सरस्वती वंदना से हुआ।
सरस्वती वंदना के बाद काव्य धारा को गति देते हुए कवि रामनरेश यादव ने भगवान कृष्ण की महिमा का बखान करते हुए पढ़ा:
‘अक्षर अक्षर छिपी हुई है शोभा अनुपम श्याम की।’
गोष्ठी के अध्यक्ष और वरिष्ठ कवि नंदकिशोर पाठक ने आधुनिक समाज और पश्चिमी सभ्यता के बढ़ते प्रभाव पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए अपनी पंक्तियों से तीखा कटाक्ष किया:
‘जो कहलाता था जगत्गुरू, अब उलटी गिनती हुई शुरू।
पश्चिमी सभ्यता का डंका, बालायें फिरती अर्ध नगन, ऐसा आया यह परिवर्तन।’
इसके बाद कवि जगपाल ‘जग’ ने बीते वक्त की यादों को संजोते हुए पढ़ा:
‘याद उसकी रह गई उसके निशां अब ना रहे।
हो गई पर्दा नशी जलवा फीशा अब ना रहे।।’
क्षेत्र के मशहूर शायर अब्दुल बहाव आज़ाद ने जीवन के शाश्वत सत्य को बेहद सादगी और दार्शनिक अंदाज में पेश कर खूब वाहवाही लूटी:
‘आप कंचन है कंचन में ढल जाएंगे।
हम तो माटी है माटी में मिल जाएंगे।।’
मंच संचालक और युवा कवि अमित अंबर ने अपनी साहित्यिक प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए ओजस्वी स्वर में पढ़ा:
‘मैं सुधा के सिंधु से कुछ बूंद लेकर इस धरा को तृप्त करना चाहता हूं।
मरुथलों में शब्द सुमनों को बिछाकर वेदना संताप हरना चाहता हूं।।’
उसावां के वरिष्ठ कवि महेश मिश्रा ‘अग्निमुख’ ने देश के अमर बलिदानियों को नमन करते हुए वीर रस की पंक्तियाँ समर्पित कीं:
‘बीच में छोड़कर तुम कहां खो गए,
तुम मरे ही नहीं तुम अमर हो गए।।’
शायर मुशीर अहमद ‘मुशीर’ ने नए रिश्तों और हौसलों को बयां करते हुए पढ़ा:
‘लोग नए हैं अजनबी हैं कोई बात नहीं,
मिला मिला के रोज हाथ पुराना बना के छोडूंगा।।’
वहीं, संतोष कुमार सिंह ने भारत माता के वैभव का गौरव गान करते हुए पढ़ा:
‘जिसका पद बंदन सिंधु करे, हिमगिरि जिसका खुद तिलक करे…’
काव्य पाठ के शानदार दौर के बाद गोष्ठी के द्वितीय सत्र में उपस्थित प्रबुद्ध वर्ग द्वारा ‘मंदाकिनी साहित्य मंच’ की आगामी काव्य पुस्तक के विमोचन की तैयारियों को लेकर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम के अंत में विद्यालय प्रशासन व आए हुए अतिथियों ने सभी रचनाकारों को शॉल व प्रतीक चिह्न भेंटकर सम्मानित किया।


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