राम मंदिर चंदा घोटाले पर गरमाई सियासत
नई दिल्ली। संसद में समाजवादी पार्टी के नेता, मुख्य सचेतक, लोक लेखा समिति के सदस्य तथा सांसद मा. धर्मेंद्र यादव ने नियम 377 के अंतर्गत एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील प्रश्न उठाया है। उन्होंने अयोध्या में प्रभु श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण और उसके प्रबंधन को लेकर हाल ही में सामने आए हजारों करोड़ रुपये के कथित चंदा घोटाले के मामले में केंद्र की भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया है। सांसद ने सरकार से स्पष्ट जवाब मांगते हुए कहा है कि इस गंभीर कृत्य से देश-विदेश के करोड़ों सनातनियों की आस्था को गहरी चोट पहुंची है।
संसद में अपनी बात रखते हुए सांसद धर्मेंद्र यादव ने याद दिलाया कि वर्ष 2019 में माननीय उच्चतम न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले के बाद अयोध्या में प्रभु श्री राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ था। इस आदेश के बाद केंद्र की भाजपा सरकार ने इसे अपनी एक बड़ी राजनीतिक उपलब्धि के रूप में प्रचारित और प्रसारित किया था। साथ ही, एक गजट नोटिफिकेशन के जरिए एक विशेष ट्रस्ट का गठन किया गया था, जिसके कंधों पर मंदिर निर्माण, उससे जुड़े तमाम कार्यों, जमीन की खरीद-फरोख्त, प्रबंधन और दान-दक्षिणा के प्रबंधन की पूरी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। सांसद ने सदन का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि शुरुआत से लेकर अब तक मंदिर से जुड़े तमाम वित्तीय कार्य इसी ट्रस्ट के माध्यम से संचालित होते आए हैं।
हाल ही में मीडिया रिपोर्ट्स के माध्यम से राम मंदिर में हजारों करोड़ रुपये के चंदा घोटाले और हेराफेरी का मामला उजागर हुआ है। इस गंभीर स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए सांसद धर्मेंद्र यादव ने केंद्र सरकार से तीखे सवाल किए। जब इस ट्रस्ट की नियुक्ति सीधे केंद्र सरकार द्वारा की गई थी और इसमें केंद्र तथा राज्य दोनों सरकारों के प्रतिनिधि भी शामिल हैं, तो इस चंदा चोरी और वित्तीय अनियमितता के लिए आखिरकार कौन जिम्मेदार है? क्या केंद्र सरकार को यह महसूस नहीं होता कि इस घपले और कुकृत्य से देश और दुनिया भर में बसे करोड़ों सनातनियों की आस्था पर गंभीर चोट और कुठाराघात हुआ है? यदि सरकार इन बातों को स्वीकार करती है, तो देश को स्पष्ट बताए कि इस चंदा चोरी में कुल कितने और कौन-कौन लोग दोषी हैं, तथा उन्हें कानून के तहत कब तक सजा मिल पाएगी?
सांसद द्वारा उठाए गए इस कड़े कदम के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और अब आम जनमानस के साथ-साथ हर कोई इस मामले में केंद्र सरकार और संबंधित ट्रस्ट के जवाब का इंतजार कर रहा है।
Budaun Amarprabhat