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टीएमयू के प्रो. राजुल रस्तोगी ने दी यूके एआई कॉन्फ्रेंस में दमदार प्रस्तुति, प्रेजेंट किए सर्वाधिक तीन रिसर्च पेपर्स

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मुरादाबाद। यूनाइटेड किंगडम- यूके की राजधानी लंदन में वेस्टमिंस्टर के क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय कन्वेंशन सेंटर में प्रतिष्ठित द्वितीय ग्लोबल एआई कॉन्फ्रेंस 2026 में तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के सीनियर रेडियोलॉजिस्ट प्रो. राजुल रस्तोगी ने वैश्विक स्तर पर अपनी तकनीकी और चिकित्सा दक्षता का लोहा मनवाया है। इंडिया की ओर से तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के रेडियोडाग्नोसिस विभाग के सीनियर रेडियोलॉजिस्ट प्रो. राजुल रस्तोगी ने सर्वाधिक 03 रिसर्च पेपर्स प्रस्तुत किए। वैश्विक सम्मेलन में प्रस्तुत 138 स्वीकृत शोध पेपर्स में भारत की ओर से कुल 04 रिसर्च पेपर्स कॉन्फ्रेंस में चुने गए थे। प्रो. रस्तोगी ने मशीन लर्निंग एमआरआई-बेस्ड मॉडल फॉर पैपिल्डेमा डिटेक्शन, मशीन लर्निंग एमआरआई-बेस्ड मॉडल फॉर अर्ली डिटेक्शन ऑफ नी ऑस्टियोआर्थराइटिस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंश एंड मशीन लर्निंग बेस्ड मॉडल इन इवैल्यूएटिंग अल्जाइमर्स डिजीज एंड इट्स एसोसिएशन विद डायबिटीज मेलिटस पर रिसर्च पेपर्स प्रस्तुत किए। प्रो. राजुल रस्तोगी कहते हैं, 45 देशों के 952 से अधिक संस्थानों के लगभग 1,000 अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की उपस्थिति में भारतीय शोधपत्रों को प्रदर्शित करना देश के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के लिए अत्यंत गर्व की बात है।

प्रो. राजुल रस्तोगी कहते हैं, दो दिनी यह अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन केवल एक अकादमिक जमावड़ा नहीं था, बल्कि रेडियोलॉजी के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के एंड-टू-एंड- प्रारंभ से अंत तक एकीकरण पर केंद्रित एक गहन कार्यशाला साबित हुआ। इसमें इमेज एक्विजिशन से लेकर क्लिनिकल ऑडिटिंग तक एआई के व्यावहारिक अनुप्रयोगों और क्षेत्र के दिग्गज रेडियोलॉजिस्टों के साथ संवाद पर विशेष जोर दिया गया। कॉन्फ्रेंस में भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं और रेडियोलॉजी के लिए 3 मुख्य प्रतिबद्धताओं- क्लिनिकल वर्कफ्लो में एआई का समावेश, उभरती चिकित्सा तकनीकों में दक्षता और अगली पीढ़ी के रेडियोलॉजिस्टों का मार्गदर्शन पर मंथन हुआ। इसमें मरीजों की बेहतर देखभाल और स्वास्थ्य प्रणालियों की दक्षता को बढ़ाने के लिए नैदानिक प्रक्रियाओं में एआई को सक्रिय रूप से एकीकृत करना, रेडियोलॉजी एंड इमेजिंग की नवीनतम एवम् अत्याधुनिक तकनीकों में महारत हासिल करना और भारत के उज्ज्वल भविष्य के रूप में नेक्स्ट-जनरेशन रेडियोलॉजिस्टों को प्रशिक्षित और प्रेरित करना आदि शामिल है।


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