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बचा लिया गर्भाशय, बची रह गई माँ बनने की संभावना

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👉*सिविल चिकित्सालय में हुई जटिल सर्जरी*

*अजय सिंह*
*लखनऊ*। गर्भाशय से लगभग 5 गुना बड़ा ट्यूमर , जो ना केवल महिला को माँ बनने से रोक रहा था, बल्कि पेशाब की नली, खून की 3 मुख्य नलियों, अंडाशय को बुरी तरह दबा रहा था, सफलता पूर्वक सर्जरी के माध्यम से हटा दिया गया। डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविल चिकित्सालय में उपचारित मात्र 29 वर्ष की महिला की किडनी सुरक्षित रखने के साथ उसकी माँ बनने की संभावनाओं को बचाए रखना चिकित्सकों की बड़ी चुनौती थी ।
चिकित्सालय के निदेशक डॉ जी पी गुप्ता ने ब्रॉड लिगामेंट मायोमेक्टॉमी (Broad Ligament Myomectomy) की सफलता पर शल्य विभागाध्यक्ष डॉ. आनंद मिश्रा एवं उनकी टीम को बधाई दी ।

मरीज काफी दिनों से पेट के निचले हिस्से में दर्द एवं सूजन की समस्या से परेशान थीं। मरीज ने अनेक ख्यातिप्राप्त चिकित्सालयों के बड़े चिकित्सकों से परामर्श लिया परंतु स्थिति की गंभीरता और माँ बनने की संभावना को बचाए रखने के लिए कोई तैयार नहीं हुआ।

सिविल अस्पताल की शल्य विभाग ओपीडी में विभागाध्यक्ष डॉ. आनंद मिश्रा द्वारा मरीज की विस्तृत जाँच कराई गई।सीटी स्कैन से उसकी गांठ का अध्ययन किया गया, मरीज में गंभीर एनीमिया भी थी, उनका हीमोग्लोबिन स्तर मात्र 6.3 ग्राम/डेसीलीटर था।मरीज की स्थिति को सुरक्षित बनाने के लिए 3 यूनिट रक्त चढ़ाया गया ।मरीज के पेट में एक बड़ा एवं जटिल ट्यूमर/गांठ मौजूद थी, जिसके कारण आसपास के अंगों पर खासकर पेशाब की नली और खून की बड़ी नलिका पर दबाव पड़ रहा था।

दायें तरफ़ दबाव के कारण मूत्रवाहिनी (Ureter) भी दब रही थी, और ट्यूमर के दबाव की वजह से दूसरी तरफ़ के यूरेटर पर दबाव बना रहा था जिससे मूत्र के प्रवाह में बाधा उत्पन्न होने की स्थिति बन गई थी और पेशाब के सही से ना निकलने के कारण किडनी में सूजन भी काफ़ी बढ़ गई थी । मरीज के बच्चे नहीं थे और वो अपनी प्रजनन क्षमता को बचाना चाहती थी ।

ऑपरेशन के दौरान अत्यंत सावधानी बरतते हुए आसपास की महत्वपूर्ण संरचनाओं को सुरक्षित रखा गया और जटिल ब्रॉड लिगामेंट मायोसरकोमा सॉलिड ट्यूमर को सफलतापूर्वक अलग कर निकाला गया। निकाले गए ट्यूमर का वजन 3.5 किलोग्राम था। गर्भाशय काफ़ी छोटा लगभग 7 cm x 6 cm और ट्यूमर लगभग 35 सेमी लंबाई × 20 सेमी चौड़ाई × 15सेमी ऊँचाई हो गया था।
मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ है ।

शल्य टीम में डॉ. आनंद मिश्रा के साथ जूनियर रेजिडेंट डॉ. विनोद कुमार वर्मा, डॉ. सचिन कुमार, एनेस्थीसिया टीम के डॉ. एस. के. सिंह एवं डॉ. मोहम्मद कासिम तथा ओटी असिस्टेंट मीनकर सुदेश कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

शल्य विभागाध्यक्ष डॉ. आनंद मिश्रा ने बताया कि ऐसे जटिल मामलों में समय पर चिकित्सकीय परामर्श, उचित जाँच, सही निदान एवं विशेषज्ञ शल्य उपचार अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने आमजन खासकर महिलाये से अपील की कि पेट के निचले हिस्से में लगातार दर्द, सूजन, असामान्य गांठ अथवा पेशाब संबंधी परेशानी को नजरअंदाज न करें और समय पर योग्य चिकित्सक से परामर्श लें। निदेशक डॉ जी पी गुप्ता ने कहा कि चिकित्सालय में मरीज हित को केंद्र में रखकर कार्य किया जा रहा है ।

चिकित्सालय की पूर्णतया डिजिटल सुपर स्पेशिलिटी ओपीडी भी सप्ताह के तीन दिन सफलता पूर्वक चल रही है, बृहस्पतिवार को न्यूरोलॉजी, शुक्रवार को कार्डियोलॉजी, शनिवार को नेफ्रोलॉजी विभाग डॉ राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के असिस्टेंट प्रोफेसर रैंक के चिकित्सकों द्वारा मरीजों का उपचार किया जा रहा है , जिससे अनेक मरीज लाभान्वित हो रहे हैं ।


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