बिल्सी। तहसील क्षेत्र के ऐतिहासिक यज्ञ तीर्थ गुधनी स्थित प्रज्ञा यज्ञ मंदिर में आर्य समाज का साप्ताहिक सत्संग पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ सुप्रसिद्ध वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप द्वारा वैदिक विधि से संपन्न कराए गए यज्ञ के साथ हुआ। इस दौरान श्रद्धालुओं ने ऋग्वेद के पवित्र मंत्रों का उच्चारण करते हुए विधि-विधान से यज्ञ में आहुतियां प्रदान कीं।
सत्संग को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए आचार्य संजीव रूप ने श्रवण और सावन माह के गहरे आध्यात्मिक संबंध पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ‘श्रवण’ शब्द से ही ‘सावन’ माह का नाम पड़ा है, जिसका शाब्दिक अर्थ ‘सुनना’ है। मनुष्य के जीवन में यह बेहद महत्वपूर्ण है कि वह अपने कानों से क्या सुनता है, क्योंकि जैसी संगति और श्रवण हम करते हैं, वैसा ही हमारी वाणी और आचरण में झलकने लगता है।
आचार्य जी ने अपनी बात को स्पष्ट करते हुए दो तोतों की प्रसिद्ध कथा का सुंदर उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि एक तोता कसाई के पास पला-बढ़ा और दूसरा एक पुजारी के यहां। समय बीतने के साथ कसाई के यहां रहने वाला तोता “लाओ, काटो, मारो” जैसी भाषा बोलने लगा, जबकि पुजारी के यहां रहने वाला तोता “ॐ, नमस्ते जी, बैठिए, राम-राम” के संस्कारयुक्त शब्द बोलने लगा। उन्होंने कहा कि दोनों ने वही सीखा और अपनाया जो उन्होंने अपने परिवेश में सुना। यही शाश्वत नियम मनुष्य के जीवन पर भी पूर्णतः लागू होता है।
उन्होंने बल देते हुए कहा कि यदि हम ईश्वर की वाणी, वेदों के दिव्य ज्ञान और उत्तम संस्कारों को सुनेंगे, तो हमारा आचरण भी श्रेष्ठ होगा। इसके विपरीत, नकारात्मक और दूषित विचारों को सुनने से हमारे कर्म और जीवनशैली भी दूषित हो सकते हैं। इसलिए सावन के इस पावन ‘श्रवण’ माह में हमें केवल उत्तम विचारों, वेदवाणी और सत्संग को सुनने का संकल्प लेना चाहिए।
वर्षा ऋतु के मौसम पर चर्चा करते हुए आचार्य संजीव रूप ने कहा कि इस मौसम में वातावरण में नमी बढ़ने के कारण विभिन्न प्रकार के कीट-पतंगे और सूक्ष्मजीव तेजी से पनपते हैं। ऐसे समय में घर-घर यज्ञ की प्राचीन परंपरा को अपनाना स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए अत्यंत आवश्यक है। यज्ञ न केवल वातावरण को शुद्ध करता है, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर स्वस्थ जीवन का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने परिवारों से आह्वान किया कि सभी मिलकर सामूहिक रूप से यज्ञ करें, जिससे घर-परिवार में सुख-शांति और सद्भाव का वातावरण बना रहे।
कार्यक्रम के अंत में साप्ताहिक सत्संग का समापन सामूहिक वैदिक प्रार्थना एवं विश्व कल्याण की मंगलकामना के साथ किया गया। इस अवसर पर राकेश आर्य, श्रीमती लीलावती देवी, श्रीमती सुराजवती देवी, श्रीमती संतोष कुमारी, श्रीमती कमलेश कुमारी, श्रीमती सरोज देवी सहित बड़ी संख्या में आर्य समाज के गणमान्य श्रद्धालु एवं आर्य संस्कार गुरुकुल के बच्चे उपस्थित रहे।
Budaun Amarprabhat