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राम ने राक्षसी ताड़का का वध कर की यज्ञ की रक्षा: ओमप्रकाश

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राम ने राक्षसी ताड़का का वध कर की यज्ञ की रक्षा: ओमप्रकाश

बिल्सी के रायपुर बुजुर्ग में रामकथा का दूसरा दिन

बिल्सी। तहसील क्षेत्र के गांव रायपुर बुजुर्ग में बाबा स्कूल के सामने मैदान पर चल रही रामकथा के दूसरे दिन शनिवार को हरियाणा के पलवल से पधारे कथावाचक ओमप्रकाश ने भगवान राम के जन्म से लेकर ताड़का वध की कथा सुनाई। कथा के माध्यम से उन्होंने बताया कि राक्षसों का आतंक बहुत ही बढ़ गया था तब जाकर विश्वामित्र अयोध्या धाम पहुंचे और उन्होंने चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ से राम-लक्ष्मण को मांगा था। यज्ञ में लागतार बाधा उत्पन्न होने के कारण विश्वामित्र ताड़का और उसके पुत्रों से अत्यंत क्रोधित थे। उनके पास ताड़का और उसके पुत्रों का नाश करने के लिए उचित पराक्रम और अस्त्र-शस्त्र भी थे। लेकिन अपनी प्रतिज्ञा के कारण वे ऐसा करने में असमर्थ थे। इसलिए विश्वामित्र अयोध्या के राजा दशरथ के पास गए और उनसे सहायता मांगी। विश्वामित्र ने राजा दशरथ से राम और लक्ष्मण को मांगा। महर्षि विश्वामित्र ने राजा दशरथ से कहा कि हे राजन, असुरों के समूह हमें बहुत सताते हैं इसीलिए मैं आपसे कुछ मांगने आया हूं। तुम मुझे छोटे पुत्र सहित श्री रघुनाथ जी को दे दो। असुरों के मारे जाने के बाद मैं सुरक्षित हो जाऊंगा। इसके बाद राम और लक्ष्मण दोनों विश्वामित्र के आश्रम की सुरक्षा करते हैं। एक दिन ताड़का के पुत्र सुबाहु और मारीच ऋषियों पर आक्रमण करने और यज्ञ में बाधा डालने के लिए आते हैं तभी राम और लक्ष्मण अपने धनुष बाण से उन पर आक्रमण करते हैं। श्रीराम के धनुष बाणों से सुबाहु की मृत्यु हो जाती है और मारीच घायल हो जाता है। पुत्रों की दुर्दशा देख ताड़का भी अत्यंत क्रोधित हो जाती है। तब विश्वामित्र राम को ताड़का का वध करने के लिए कहते हैं। इसके बाद भगवान राम ने एक ही बाण से ताड़का का वध कर दिया। इसके बाद कथा में आरती की गई। बाद में प्रसाद का वितरण किया गया। इस मौके पर काफी लोग मौजूद रहे।


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