भागवत कथा मनुष्य के जीवन को सार्थक बनाती है: उमंग दीक्षित
यज्ञ और भंडारे के साथ भवन मंदिर में संपन्न हुई कथा
बिल्सी। श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण मनुष्य जीवन को सार्थक बनाती है। जन्म तो हर प्राणी एवं मनुष्य लेता है लेकिन उसे अपने जीवन का अर्थ बोध नहीं होता है। बाल्यावस्था से लेकर मृत्यु तक वह सांसारिक गतिविधियों में ही लिप्त होकर इस अमूल्य जीवन को नश्वर बना देता है। श्रीमद् भागवत ऐसी कथा है जो जीवन के उद्देश्य एवं दिशा को दर्शाती है। इसलिए जहां भी भागवत होती है इसे सुनने मात्र से वहां का संपूर्ण क्षेत्र दुष्ट प्रवृत्तियों से खत्म होकर सकारात्मक उर्जा से सशक्त हो जाता है। यह बात मोहल्ला संख्या पांच के शिव शक्ति भवन मंदिर में परिसर में चल रही भागवत कथा के अंतिम दिन शुक्रवार को कथावाचक आचार्य उमंग दीक्षित ने कही। उन्होंने कहा श्रीकृष्ण का जन्म मनुष्य जीवन के उद्धार के लिए हुआ है। कंस ने उनके जन्म लेने को रोकने के लिए अथक प्रयास किए लेकिन सफल नहीं हो पाया। अंत मेंं अपने पापों का घड़ा भरने पर श्रीकृष्ण के हाथों मरकर मोक्ष की प्राप्ति की। कथा के समापन पर यहां नारायन यज्ञ भी कराया गया। जिसमें लोगों ने आहुतियां दी। बाद में भंडारा आयोजित किया गया। जिसमें लोगों ने प्रसाद को ग्रहण किया। कथा को सफल बनाने में संजीव खासट, रानी खासट, सिद्धार्थ खासट, भव्या खासट, श्रीकृष्ण स्वरुप दीक्षित, अमित कुमार, निक्की दीक्षित आदि का विशेष सहयोग रहा।
Budaun Amarprabhat