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शुभ कर्म करने वाले ही ईश कृपा के होते हैं पात्र: संजीव रूप

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शुभ कर्म करने वाले ही ईश कृपा के होते हैं पात्र: संजीव रूप

बिल्सी। तहसील क्षेत्र के गांव गुधनी स्थित आर्य समाज मंदिर पर रविवार को साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। यहां सर्वप्रथम यज्ञ उसके पश्चात सत्संग किया गया। तृप्ति शास्त्री ने वेद मंत्रों से आहुतियां दिलाईं। यज्ञ ब्रह्मा आचार्य संजीव रूप ने कहा कि परमेश्वर की दया तो सब पर होती है पर कृपा किसी किसी पर ही होती है। दया और कृपा में अंतर है। दया अच्छे और बुरे सभी पर होती है पर कृपा केवल अच्छाई के मार्ग पर चलने वालों पर ही होती है। रोटी, कपड़ा और जीवन के लिए जो मूलभूत आवश्यकताएं हैं उन्हें अच्छे और बुरे पापी और धर्मात्मा सबको परमात्मा देता है यह उसकी दया है, किंतु जो विशेष सद्गुणों विद्या, तप, दान ज्ञान, शील, सत्य, सेवा, परोपकार आदि को धारण कर यशस्वी व कीर्तिमान होते हैं ये ही परमात्मा की कृपा होती है। अतः प्रत्येक मनुष्य को परमात्मा की दया का नहीं कृपा का पात्र बनने का प्रयत्न करना चाहिए और यह तभी संभव है जब मनुष्य सत्संग व स्वाध्याय करता रहे। शुभ कर्म करता रहे। तृप्ति आर्य, मोना आर्य, ईशा आर्य ने भजन गाकर सबको मंत्र मुग्ध कर दिया। इस मौके पर विचित्रपाल सिंह, अगरपाल सिंह, मुन्नी देवी, मिथिलेश कुमारी, सूरजवती देवी, सरोजा देवी, साहब सिंह आदि मौजूद रहे।


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