पृथ्वी पर असुरों का अत्याचार बढ़ने पर अवतार लेते प्रभु

बिल्सी के माहेश्वरी भवन में शुरु हुई राम कथा
बिल्सी। कछला रोड स्थित माहेश्वरी भवन में मंगलवार को श्रीराम-कृष्ण समिति के बैनर तले शुरु हुई रामकथा के पहले दिन ऋषिकेश (उत्तराखंड) से पधारे कथावाचक अयोध्यादास रामायणी महाराज ने भगवान राम के विवाह का विस्तृत वर्णन करते हुए धनुष भंग के प्रसंग का मार्मिक ढंस से प्रस्तुत किया। उन्होनें बताया कि विश्वामित्र मुनि राम और लक्ष्मण को लेकर जनकपुरी पहुंचे। वहां शिव धनुष तोड़ने की शर्त पर सीता का विवाह राम से तय हुआ। कथा की शुरुआत त्रेता युग में राक्षसों के अत्याचार और विश्वामित्र मुनि के यज्ञ की रक्षा से हुई। यज्ञ के बाद विश्वामित्र मुनि राम-लक्ष्मण के साथ जनकपुरी की ओर गए। राजा जनक द्वारा रखी गई शिव धनुष तोड़ने की शर्त और भगवान राम द्वारा धनुष भंग कर सीता से विवाह का प्रसंग कथा का मुख्य आकर्षण रहा। कथावाचक ने कहा कि पृथ्वी पर जब-जब असुरों का अत्याचार बढ़ा, तब-तब ईश्वर ने किसी न किसी रूप में अवतार लेकर असुरों का संहार किया है। उसी प्रकार भगवान राम ने भी पृथ्वी लोक पर आकर धर्म की स्थापना की और लोगों का कल्याण किया। उन्होनें अन्य कई प्रसंगों की भी सुनाया। इस मौके पर नरेन्द्र गरल, डा.राजाबाबू वाष्र्णेय, चन्द्रपाल तोष्णीवाल, सत्यपाल वार्ष्णेय, मनोज वार्ष्णेय, लोकेश बाबू वार्ष्णेय, नीरज माहेश्वरी, संजीव वार्ष्णेय, दुर्गेश बाबू वार्ष्णेय, आशीष वशिष्ठ आदि मौजूद रहे।
Budaun Amarprabhat