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टीएमयू में उत्तम तप धर्म पर तपोव्रत का संकल्प

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मुरादाबाद। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद में पर्वाधिराज दशलक्षण महामहोत्सव के सातवें दिन उत्तम तप धर्म पर प्रतिष्ठाचार्य ऋषभ जैन शास्त्री के सानिध्य में नव देवता पूजन, श्री आदिनाथ जिन पूजन, सोलहकारण पूजन, दशलक्षण पूजन विधि-विधान के साथ हुए। इस मौके पर सैकड़ों श्रावक-श्राविकाओं ने तपोव्रत का संकल्प लिया। प्रथम स्वर्ण कलश से कुशाग्र जैन, द्वितीय स्वर्ण कलश से दिव्यांशु जैन, तृतीय स्वर्ण कलश से अविनाश जैन, चतुर्थ स्वर्ण कलश से आदित्य डॉ. रत्नेश जैन को अभिषेक का सौभाग्य मिला। प्रथम स्वर्ण शांतिधारा का पुण्य डॉ. हर्षित सेठी, डॉ. अनुष्का, डॉ. उपिका, डॉ. अंशिका, डॉ. सजल, डॉ. अंशी जैन, उमंग गंगवाल, अरिहंत जैन, टीशा जैन ने कमाया। द्वितीय रजत शांतिधारा का सौभाग्य डॉ. अक्षय जैन, आरव जैन, स्वाति जैन को मिला। अष्ट कुमारी का पुण्य ऋषिता जैन ने कमाया। झलक जैन एवम् गणिका जैन ने भक्तांबर का पाठ किया। तत्वार्थ सूत्र के सप्तम अध्याय का वाचन रोशन जैन ने किया। उत्तम तप धर्म पर कुलाधिपति सुरेश जैन, फर्स्ट लेडी श्रीमती वीना जैन, जीवीसी मनीष जैन, श्रीमती ऋचा जैन, एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर अक्षत जैन, श्रीमती जाह्नवी जैन आदि की गरिमामयी मौजूदगी रही।

प्रतिष्ठाचार्य ऋषभ जैन शास्त्री ने रिद्धि-सिद्धि भवन में मंगलवार की शाम को उत्तम संयम धर्म पर बोलते हुए कहा, मन, वचन और काय से संयम स्वीकारने से ही जीवन में संयम प्राप्त हो सकता। आज संयम का दिन है। पांचोंद्रि और मन को वश में करना ही संयम है। तभी अंतरंग का संयम आ सकता हैं। मोक्ष रूपी फल सिर्फ संयम पर ही लगता है, बिना संयम के मोक्ष संभव नहीं है। भोपाल की सचिन एंड पार्टी के भक्तिमय भजनों- संकट हमारा कौन हरेगा, तुम ना सुनोगे तो कौन सुनेगा…, बिन पानी के नाव खे रहा है, वो नसीबों के सहारे…, झूम उठी धरती तो झूम उठा आसमां, प्रभु तेरी भक्ति से तरगी आत्मा…, कभी तू पारस लगता है, कभी तू हीरा लगता है, कभी तू नजर लगाता है, कभी तू तीर्थंकर लगता है…, प्रभु नाम जपने से नवजीवन मिलता है…, जिन चरणों में हम आते रहे, सर झुकते रहे, खेल कहीं तुम वही तो नहीं…सरीखे भजनों पर रिद्धि-सिद्धि भवन झूम उठा।

उत्तम संयम धर्म की सांस्कृतिक संध्या से पूर्व लॉ कॉलेज के डीन प्रो. हरबंश दीक्षित और प्रिंसिपल प्रो. एसके सिंह को दिव्य घोष के बीच श्रीजी की आरती जिनालय से रिद्धि-सिद्धि भवन तक ले जाने का सौभाग्य मिला। मंगलचारण के संग लॉ कॉलेज के स्टुडेंट्स की ओर से ऑडी में नेमी-राजुलः एक अमृत गाथा नाटक मंचन का शंखनाद हुआ। नेमी-राजुल प्रेमः अधूरा संयम से पूरा कथा के जरिए जीवन में संयम और त्याग का अद्भुत संदेश दिया। राजकुमार नेमिनाथ और राजुल के बीच गहरा प्रेम था, विवाह का समय भी निश्चित हुआ। परंतु नेमी ने जब जीवों की रक्षा के लिए संयम का मार्ग चुना, तो उन्होंने विवाह का त्याग कर दिया। यह निर्णय केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि समस्त जीवों की करुणा और अहिंसा के लिए था। राजुल का प्रेम अधूरा रह गया, किंतु नेमी का संयम पूर्ण हो गया। यह कथा हमें सिखाती है कि सच्चा त्याग और संयम ही मानव जीवन को महान और पूज्य बनाते हैं। नाटक का संयोजन डॉ. नम्रता जैन ने किया। इन कार्यक्रमों ओर अनुष्ठानों में वीसी प्रो. वीके जैन, श्री मनोज जैन, प्रो. प्रवीण कुमार जैन, डॉ. रत्नेश जैन, डॉ. विनोद जैन, डॉ. आशीष सिंघई आदि मौजूद रहे।


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